शिकायत बोल

शिकायत बोल
ऐसा कौन होगा जिसे किसी से कभी कोई शिकायत न हो। शिकायत या शिकायतें होना सामान्य और स्वाभाविक बात है जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। हम कहीं जाएं या कोई काम करें अपनों से या गैरों से कोई न कोई शिकायत हो ही जाती है-छोटी या बड़ी, सहनीय या असहनीय। अपनों से, गैरों से या फ़िर खरीदे गये उत्पादों, कम्पनियों, विभिन्न सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की सेवाओं, लोगों के व्यवहार-आदतों, सरकार-प्रशासन से कोई शिकायत हो तो उसे/उन्हें इस मंच शिकायत बोल पर रखिए। शिकायत अवश्य कीजिए, चुप मत बैठिए। आपको किसी भी प्रकार की किसी से कोई शिकायत हो तोर उसे आप औरों के सामने शिकायत बोल में रखिए। इसका कम या अधिक, असर अवश्य पड़ता है। लोगों को जागरूक और सावधान होने में सहायता मिलती है। विभिन्न मामलों में सुधार की आशा भी रहती है। अपनी बात संक्षेप में संयत और सरल बोलचाल की भाषा में हिन्दी यूनीकोड, हिन्दी (कृतिदेव फ़ोन्ट) या रोमन में लिखकर भेजिए। आवश्यक हो तो सम्बधित फ़ोटो, चित्र या दस्तावेज जेपीजी फ़ार्मेट में साथ ही भेजिए।
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शुक्रवार, 22 अगस्त 2014

धर्मान्तरण

यह क्या-क्यों हो रहा है भैया
कश्मीर घाटी में २० साल पहले ५०% हिंदू थे, आज एक भी हिंदू नहीं बचा ! केरल में १० साल पहले तक ६०% जनसंख्या हिन्दुओ की थी, आज सिर्फ १०% हिंदू केरल में है। कहां गये वे हिन्दू ? पूर्वोत्तर यानी नॉर्थ-ईस्ट (सिक्किम, नगालैंड, मिजोरम, असम आदि) में हिन्दुओं का तेजी से धर्मपरिवर्तन होता रहा हैं। हिंदू हर रोज मारे या भगाए जाते रहे हैं। उन्हें सुरक्षा नहीं मिली।
देश की राजधानी में भी मिशनरियां बड़े चालाकी भरे अन्दाज़ में सक्रिय हैं। अब अनेक सालों से धर्मान्तरण करने वाले व्यक्ति का जाति नाम या उपनाम नहीं बदला जाता। जैसे पहले धर्मान्तरण के बाद राम लुभाया चौधरी का नाम राम लुभाया डिसूजा या जॉर्ज वगैरह हो जाता था। अब उसका नाम राम लुभाया चौधरी ही बना रहेगा। 
गम्भीर हालत में अस्पतालों के आईसीयू में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों की स्थिति और भावनाओं का शोषण करते हुए ४-६ मिशनरी के लोग प्रार्थना करते हैं। कुछ ही देर में प्रार्थना में ‘परमेश्वर" शामिल हो जाते हैं। यदि मरीज ठीक हो गया तो ये लोग उसके घर जाकर प्रार्थना करने पर जोर देते हैं। ज्यादातर लोग मान जाते हैं क्योंकि मरीज उनकी प्रार्थना से ही ठीक हुआ है- ऐसा उन्हें बताया जाता है। कई मामलों में धर्मान्तरण कराने में सफ़लता मिल जाती है। तमाम बड़े अस्पतालों में ड्यूटी कर रहे नर्सिंग स्टाफ़, वार्ड ब्वाय और डॉक्टरों में बड़ी संख्या धर्मान्तरित पूर्वोत्तर राज्यों व दक्षिण भारतीयों (केरल, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश आदि) की है। ये और अस्पताल स्टाफ़ के कुछ लोग भी मिशनरियों को पर्याप्त सहयोग देते हैं। ये लोग अपने अभियान की सफ़लता हेतु हिन्दू देवी-देवताओं का नाम शामिल करना भी नहीं भूलते।
यहां लिखे का मैं स्वयं प्रमाण हूं। (चित्र: साभार)

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