शिकायत बोल

शिकायत बोल
ऐसा कौन होगा जिसे किसी से कभी कोई शिकायत न हो। शिकायत या शिकायतें होना सामान्य और स्वाभाविक बात है जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। हम कहीं जाएं या कोई काम करें अपनों से या गैरों से कोई न कोई शिकायत हो ही जाती है-छोटी या बड़ी, सहनीय या असहनीय। अपनों से, गैरों से या फ़िर खरीदे गये उत्पादों, कम्पनियों, विभिन्न सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की सेवाओं, लोगों के व्यवहार-आदतों, सरकार-प्रशासन से कोई शिकायत हो तो उसे/उन्हें इस मंच शिकायत बोल पर रखिए। शिकायत अवश्य कीजिए, चुप मत बैठिए। आपको किसी भी प्रकार की किसी से कोई शिकायत हो तोर उसे आप औरों के सामने शिकायत बोल में रखिए। इसका कम या अधिक, असर अवश्य पड़ता है। लोगों को जागरूक और सावधान होने में सहायता मिलती है। विभिन्न मामलों में सुधार की आशा भी रहती है। अपनी बात संक्षेप में संयत और सरल बोलचाल की भाषा में हिन्दी यूनीकोड, हिन्दी (कृतिदेव फ़ोन्ट) या रोमन में लिखकर भेजिए। आवश्यक हो तो सम्बधित फ़ोटो, चित्र या दस्तावेज जेपीजी फ़ार्मेट में साथ ही भेजिए।
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ई-मेल: शिकायत बोल
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शुक्रवार, 26 सितंबर 2014

पैकिंग

माल से बड़ा लिफ़ाफ़ा
बाज़ार में मिलने वाली अनगिनत वस्तुएं ऐसी हैं जो तरह-तरह की पैकिंग में मिलती हैं। ज्यादातर मामलों में यही देखा गया है कि पैकिंग बहुत बड़ी होती है और उसमें रखा गया सामान बहुत कम होता है जो उससे आधे आकार की पैकिंग में भी आसानी से आ जाता। इस तरह यह काम संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में ही आता है। उत्पादक अतिरिक्त व्यय को अन्तत: ग्राहक से ही वसूलता है। 
पैकिंग उचित आकार की और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि ग्राहक को दिखाई दे कि वह क्या और कितना सामान पैकिंग में लाया है। इसके अलावा अक्सर पैक्ड वस्तु का वजन भी बेतुका होता है- २३०, ८५, ३५ ८०, ४५०...ग्राम। 

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