शिकायत बोल

शिकायत बोल
ऐसा कौन होगा जिसे किसी से कभी कोई शिकायत न हो। शिकायत या शिकायतें होना सामान्य और स्वाभाविक बात है जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। हम कहीं जाएं या कोई काम करें अपनों से या गैरों से कोई न कोई शिकायत हो ही जाती है-छोटी या बड़ी, सहनीय या असहनीय। अपनों से, गैरों से या फ़िर खरीदे गये उत्पादों, कम्पनियों, विभिन्न सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की सेवाओं, लोगों के व्यवहार-आदतों, सरकार-प्रशासन से कोई शिकायत हो तो उसे/उन्हें इस मंच शिकायत बोल पर रखिए। शिकायत अवश्य कीजिए, चुप मत बैठिए। आपको किसी भी प्रकार की किसी से कोई शिकायत हो तोर उसे आप औरों के सामने शिकायत बोल में रखिए। इसका कम या अधिक, असर अवश्य पड़ता है। लोगों को जागरूक और सावधान होने में सहायता मिलती है। विभिन्न मामलों में सुधार की आशा भी रहती है। अपनी बात संक्षेप में संयत और सरल बोलचाल की भाषा में हिन्दी यूनीकोड, हिन्दी (कृतिदेव फ़ोन्ट) या रोमन में लिखकर भेजिए। आवश्यक हो तो सम्बधित फ़ोटो, चित्र या दस्तावेज जेपीजी फ़ार्मेट में साथ ही भेजिए।
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ई-मेल: शिकायत बोल
shikayatbol@gmail.com
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बुधवार, 20 जून 2012

खुदरा मूल्य

खुदरा मूल्य की औकात
एमआरपी बेमतलब
१३० रुपये के कागज का अधिकतम
अंकित खुदरा मूल्य: २१० रुपये
हाल ही में मैंने ए-४ आकार का कागज़ का पैकिट १३० रुपये देकर खरीदा जिस पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) २१० रुपये अंकित है। यह क्या बदमाशी है। ग्राहक की एमआरपी के नाम पर भी ठगाई। 
अब भी दुकानदार पर ही निर्भर है कि वह ग्राहक को सामान कितने में दे। एमआरपी की सीमा भी इसमें बाधक नहीं है। अनेक वस्तुएं एमआरपी से अधिक दाम पर भी बिक रही हैं। लेना है तो लो वरना खिसको... 
सरकार कहती है- जागो ग्राहक जागो! 
चौकीदार भी कहता है- जागते रहो!

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