शिकायत बोल

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ऐसा कौन होगा जिसे किसी से कभी कोई शिकायत न हो। शिकायत या शिकायतें होना सामान्य और स्वाभाविक बात है जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। हम कहीं जाएं या कोई काम करें अपनों से या गैरों से कोई न कोई शिकायत हो ही जाती है-छोटी या बड़ी, सहनीय या असहनीय। अपनों से, गैरों से या फ़िर खरीदे गये उत्पादों, कम्पनियों, विभिन्न सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की सेवाओं, लोगों के व्यवहार-आदतों, सरकार-प्रशासन से कोई शिकायत हो तो उसे/उन्हें इस मंच शिकायत बोल पर रखिए। शिकायत अवश्य कीजिए, चुप मत बैठिए। आपको किसी भी प्रकार की किसी से कोई शिकायत हो तोर उसे आप औरों के सामने शिकायत बोल में रखिए। इसका कम या अधिक, असर अवश्य पड़ता है। लोगों को जागरूक और सावधान होने में सहायता मिलती है। विभिन्न मामलों में सुधार की आशा भी रहती है। अपनी बात संक्षेप में संयत और सरल बोलचाल की भाषा में हिन्दी यूनीकोड, हिन्दी (कृतिदेव फ़ोन्ट) या रोमन में लिखकर भेजिए। आवश्यक हो तो सम्बधित फ़ोटो, चित्र या दस्तावेज जेपीजी फ़ार्मेट में साथ ही भेजिए।
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शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

सांसद

एक सांसद कित्ता भारी
जो लोग वादा कर रहे थे अब वे लोग संसद कैंटीन की सब्सिडी खत्म होने पर अपनी गैस सब्सिडी नही लूंगा के वादे को पूरा करने के लिये तैयार हो जाएंगे । संसद की कैंटीन में मिलने वाला सब्सिडी का सस्ता खाना जल्द ही बंद किया जा सकता है। ये खाना सांसदों और संसद भवन में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों को बाहर मिलने वाले खाने की तुलना में काफी कम कीमत में मिलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर सभी दलों के बड़े नेताओं को सलाह-मश्विरा करने की सलाह दी है। अगर विपक्ष के साथ इस मुद्दे पर कोई राय बनती है तो संसद की कैंटीन के खाने में मिलने वाली सब्सिडी हटाई जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस पार्टी कैंटिन के खाने से सब्सिडी हटाने के लिए राजी हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक सभी बीजेपी सांसद इस सब्सिडी को हटाए जाने के पक्ष में है। 
गौर हो कि संसद की कैंटीन में सांसदों की एक महीने की सैलरी 1.4 लाख की होने के बावजूद उन्हें संसद की कैंटीन में मिलने वाले खाने बड़ी छूट मिलती है। इतना कि एक मसाला डोसा के लिए उन्हें सिर्फ 6 रुपये, एक प्लेट मटन के लिए 20 रुपये, वेजिटेबल स्टियू 4 रुपये, चावल 4 रुपये और मटन बिरयानी 41 रुपये की मिलती है। यहां खाने की कीमत अंतिम बार साल 2010 में संशोधित की गई थी लेकिन पिछले महीने एक आरटीआई में सूचना मांगे जाने पर ये पता चला कि संसद की इस कैंटीन को पिछले पांच सालों में 60.7 करोड़ की सब्सिडी मिली है। इसके तुरंत बाद इस सब्सिडी को हटाए जाने की मांग तेज होने लगी है। कुछ राजनेताओं के एक वर्ग ने इसे अवांछित विशेषाधिकार बताते हुए इसे जल्द से जल्द हटाए जाने की मांग की।

ये मांग तब और तेज हो गई जब पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की, अगर उनके बस में हो तो वे गैस सब्सिडी छोड़ दें। यहाँ सभी तेल कम्पनियों ने भी अपनी कम्पनी के व्योरे में बताया है की अब तक पूरे देश में 80 हजार से ज्यादा लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी है जो की आप तेल कम्पनियो की वेव साईट पर व्योरे का विवरण देख सकते है।
पिछले हफ्ते ही एक सांसद ने लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को एक पत्र लिखकर कहा कि, 'जनता का सांसदों के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए ज़रुरी है कि इस सब्सिडी को हटा लिया जाए। पीएम मोदी के आग्रह पर जिस तरह से लोगों ने आगे बढ़कर 80 हजार लोगों ने कुकिंग गैस छोड़ने की पहल की है वो स्वागत योग्य है, इसी तर्क के अंतर्गत मुझे लगता है कि हम सांसदों को भी अपनी संसद फूड सब्सिडी छोड़ देनी चाहिए।'
साथ ही सांसदों से संसद में उनकी कैंटीन में मिलने वाली सब्सिडी को समाप्त करने की अपील करते हुए एक ऑनलाइन याचिका जारी की गयी है। संसद भवन परिसर समिति में खाद्य प्रबंधन के अध्यक्ष ए पी जितेंद्र रेड्डी से सब्सिडी समाप्त करने का अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार सांसद ने भी लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को पत्र लिखकर सब्सिडी समाप्त करने की मांग की है। सुमित्रा महाजन ने सोमवार को कहा था कि सब्सिडी और खाद्य पदार्थों और सेवा की गुणवत्ता के मुद्दे पर संसदीय कैंटीन समिति और प्रेस गैलरी समिति समेत सभी पक्षों के साथ संवाद के माध्यम से ध्यान दिया जा रहा है। इसी सत्र में संसद कैंटीन की सब्सिडी बंद की जा सकती है। 
• नरेन्द्र कुमार कुमावत/फ़ेसबुक
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सांसदों को प्राप्त वेतन-सुविधाएं

सांसदों की वेतनवृद्धि: ( पूरा पढ़ें ) वर्तमान में सांसदों को मिलने वाली सुविधायें :-
1. वेतन = 50000/- रु.
2. संसदीय क्षेत्र भत्ता = 45000/- रू. 3. कार्यालय भत्ता खर्च = 45000/- रू. 4. दैनिक भत्ता = 14000/- रुपये औसत ! अन्य भत्ते जोड़कर प्रतिमाह वेतन = 1,54,000/- रुपये !
इसके अतिरिक्त 2000/- रुपये प्रतिदिन संसद में उपस्थिति के जब तक संसद चलता है ! अन्य सुविधायें :-
1. घर में इस्तेमाल के लिये तीन टेलिफोन लाइन, हर लाइन पर सालाना 50,000 लोकल कॉल मुफ़्त !
2. घर में फर्निचर के लिये 75000/- रु. ! 3. पत्नी या किसी और के साथ साल में 34 हवाई यात्रायें मुफ़्त !
4. रेल यात्रा के लिये फ़र्स्ट एसी का टिकट मुफ़्त !
5. घर में सालाना 40 लाख लिटर मुफ़्त पानी ! 
6. सालाना 50 हजार यूनिट बिजली मुफ़्त ! 
7. सड़क यात्रा के लिये 16/- रू. प्रति किलोमीटर का किराया भत्ता ! 
8. सांसद और उसके आश्रितों को किसी भी सरकारी अस्पताल में मुफ़्त इलाज की सुविधा !
9. निजी अस्पतालों में इलाज पर वास्तविक खर्च का भुगतान सरकारी खजाने से ! 
10. दिल्ली के पाॅश इलाके में फ्लैट या बंगला! 
11. वाहन के लिये ब्याज रहित लोन 4,00,000/- रू.
12. कम्प्यूटर खरीदने के लिये दो लाख रुपये सरकारी खजाने से !
13. हर तीसरे महीने पर्दे और सोफा कवर धुलवाने का खर्च सरकारी खजाने से !
14. सबसे बडी बात :- इनकी आय, आयकर से मुक्त है ! इनको income tax नहीं लगता !
* भ्रष्टाचार से होने वाली आय इसके अतिरिक्त है !
हमारी जिन्द्गियों को नर्क बनाने के लिये क्या इतना कम है, जो ये इन सबका भी दुगुना चाह रहे हैं? क्या इन्हीं "अच्छे दिन" के लिये जनता ने सरकार चुनी है?
एक ओर हमारे पीएम साहब आम जनता से अपील करते हैं, कि आप सब्सिडी का पैसा छोड़ दें, जरूरतमंदों के काम आएगा। वो हम गरीबों के खून- पसीनों से कमाई हुई गाढ़ी मेहनत का पैसा भी लूट लेना चाहते हैं, जैसे कि हमें पैसों की कोई जरूरत ही नहीं और अपने लिए इनकी पैसों की भूख मिट ही नहीं रही है, जैसे कि पैसा ही इनके लिए सबकुछ है।
अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता ! वाह रे लुटेरों.. कुछ तो शर्म करो ! इस मैसेज को इतना शेयर करें, कि ये जन जन तक पहुंचे !!
• अनिल ठाकुर विद्रोही/फ़ेसबुक

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