शिकायत बोल

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ऐसा कौन होगा जिसे किसी से कभी कोई शिकायत न हो। शिकायत या शिकायतें होना सामान्य और स्वाभाविक बात है जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। हम कहीं जाएं या कोई काम करें अपनों से या गैरों से कोई न कोई शिकायत हो ही जाती है-छोटी या बड़ी, सहनीय या असहनीय। अपनों से, गैरों से या फ़िर खरीदे गये उत्पादों, कम्पनियों, विभिन्न सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की सेवाओं, लोगों के व्यवहार-आदतों, सरकार-प्रशासन से कोई शिकायत हो तो उसे/उन्हें इस मंच शिकायत बोल पर रखिए। शिकायत अवश्य कीजिए, चुप मत बैठिए। आपको किसी भी प्रकार की किसी से कोई शिकायत हो तोर उसे आप औरों के सामने शिकायत बोल में रखिए। इसका कम या अधिक, असर अवश्य पड़ता है। लोगों को जागरूक और सावधान होने में सहायता मिलती है। विभिन्न मामलों में सुधार की आशा भी रहती है। अपनी बात संक्षेप में संयत और सरल बोलचाल की भाषा में हिन्दी यूनीकोड, हिन्दी (कृतिदेव फ़ोन्ट) या रोमन में लिखकर भेजिए। आवश्यक हो तो सम्बधित फ़ोटो, चित्र या दस्तावेज जेपीजी फ़ार्मेट में साथ ही भेजिए।
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गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013

वैलेंटाइन

वैलेंटाइन डे कथा
अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है। जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है। यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है। अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है। हमारे यहाँ के लड़के-लड़िकयां बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं।
यूरोप (और अमेरिका) का समाज रखैलों (Kept) में विश्वास रखता है, पत्नियों में नहीं। यूरोप और अमेरिका में आपको शायद ही ऐसा कोई पुरुष या मिहला मिले जिसकी एक शादी हुई हो, जिनका एक पुरुष से या एक स्त्री से सम्बन्ध रहा हो और ये एक दो नहीं हजारों साल की परम्परा है उनके यहाँ। आपने सुना होगा Live in Relationship, ये शब्द आज कल हमारे देश में भी नव-अभिजात्य वर्ग में चल रहे हैं, इसका मतलब होता है कि ‘बिना शादी के पती-पत्नी की तरह से रहना’| तो उनके यहाँ, मतलब यूरोप और अमेरिका में ये परम्परा आज भी चलती है, खुद प्लेटो (एक यूरोपीय दार्शनिक) का एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा। प्लेटो ने लिखा है कि ‘मेरा 20-22 स्त्रीयों से सम्बन्ध रहा है।’ अरस्तु भी यही कहता है और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि ‘एक स्त्री के साथ रहना, ये तो कभी संभव ही नहीं हो सकता’- It's Highly Impossible"  तो वहां एक पत्नी जैसा कुछ होता नहीं। और इन सभी महान दार्शनिकों का तो कहना है कि ‘स्त्री में तो आत्मा ही नहीं होती’, ‘स्त्री तो मेज और कुर्सी के समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तो पुराना हटा के नया ले आये।’
बीच-बीच में यूरोप में कुछ-कुछ ऐसे लोग भी निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की ऐसी व्यवस्थाओं पर कड़ी टिप्पणी की। उन कुछ लोगों में से एक ऐसे ही यूरोपियन व्यक्ति थे जो आज से लगभग 1500 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था - वैलेंटाइन। और ये कहानी है 478 AD (after death) की, यानी ईसा की मृत्यु के बाद।
उस वैलेंटाइन नाम के महापुरुष का कहना था कि ‘हम लोग (यूरोप के लोग) जो शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं कुत्तों की तरह से, जानवरों की तरह से, ये अच्छा नहीं है, इससे सेक्स-जनित रोग (veneral disease) होते हैं, इनको सुधारो, एक पति-एक पत्नी के साथ रहो, विवाह कर के रहो, शारीरिक संबंधो को उसके बाद ही शुरू करो।’ ऐसी-ऐसी बातें वो करते थे और वो वैलेंटाइन महाशय उन सभी लोगों को ये सब सिखाते थे, बताते थे जो उनके पास आते थे। रोज उनका भाषण यही चलता था रोम में घूम-घूम कर।
संयोग से वैलेंटाइन चर्च के पादरी हो गए तो चर्च में आने वाले हर व्यक्ति को यही बताते थे। लोग उनसे पूछते थे कि ये वायरस आप में कहाँ से घुस गया। ये तो हमारे यूरोप में कहीं नहीं है, तो वो कहते थे कि ‘आजकल मैं भारतीय सभ्यता और दर्शन का अध्ययन कर रहा हूँ, और मुझे लगता है कि वह परफेक्ट है और इसिलए मैं चाहता हूँ कि आप लोग इसे मानो।’ कुछ लोग उनकी बात को मानते थे। जो लोग उनकी बात को मानते थे उनकी शादियाँ वो चर्च में कराते थे। एक-दो नहीं उन्होंने सैकड़ों शादियाँ करवाई थीं
जिस समय वैलेंटाइन हुए, उस समय रोम का राजा था क्लॉडियस। क्लौड़ीयस ने कहा कि ‘ये जो आदमी है- वैलेंटाइन, ये हमारे यूरोप की परंपरा को बिगाड़ रहा है। हम बिना शादी के रहने वाले लोग हैं, मौज-मजे में डूबे रहने वाले लोग हैं, और ये शादियाँ करवाता फ़िर रहा है। ये तो अपसंस्कृति फैला रहा है। हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहा ह॥ तो क्लॉडियस ने आदेश दिया कि ‘जाओ वैलेंटाइन को पकड़ कर लाओ। उसके सैनिक वैलेंटाइन को पकड़ कर ले आए। क्लॉडियस ने वैलेंटाइन से कहा कि ‘ये तुम क्या गलत काम कर रहे हो ? तुम अधर्म फैला रहे हो, अपसंस्कृति ला रहे हो।’ तो वैलेंटाइन ने कहा कि ‘मुझे लगता है कि ये ठीक है, क्लॉडियस ने उसकी एक बात न सुनी और उसने वैलेंटाइन को फाँसी की सजा दे दी। आरोप क्या था कि वो बच्चों की शादियाँ कराते थे, मतलब शादी कराना जुर्म था। क्लॉडियस ने उन सभी बच्चों को बुलाया जिनकी शादी वैलेंटाइन ने करवाई थी और उन सभी के सामने वैलेंटाइन को 14 फ़रवरी 498 ईःवी को फाँसी दे दी गयी।
पता नहीं आप में से कितने लोगों को मालूम है कि पूरे यूरोप में 1950 ईःवी तक खुले मैदान में, सावर्जानिक तौर पर फाँसी देने की परंपरा थी। तो जिन बच्चों ने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थी वो बहुत दुखी हुए और उन सब ने उस वैलेंटाइन की दुखद याद में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया। उस दिन से यूरोप में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | मतलब यह हुआ कि वैलेंटाइन, जो कि यूरोप में शादियाँ करवाते फ़िरते थे, चूंकि राजा ने उनको फाँसी की सजा दे दी तो उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है। यह था वैलेंटाइन डे का इतिहास और इसके पीछे का आधार।
अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है। जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है। यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है। अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है। हमारे यहाँ के लड़के-लड़िकयां बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं। जो कार्ड होता है उसमे लिखा होता है- Would You Be My Valentine" जिसका मतलब होता है- क्या आप मुझसे शादी करेंगे। मतलब तो किसी को मालूम होता नहीं है, वो समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं उन्हें ये कार्ड देना चाहिए तो वो इसी कार्ड को अपने मम्मी-पापा को भी दे देते हैं, दादा-दादी को भी दे देते हैं और एक दो नहीं दस-बीस लोगों को यही कार्ड वो दे देते हैं। और इस धंधे में बड़ी-बड़ी कंपिनयाँ लग गयी हैं जिनको कार्ड बेचना है, जिनको गिफ्ट बेचना है, जिनको चाकलेट बेचनी हैं और टेलीविजन चैनल वालों ने इसका धुंआधार प्रचार कर दिया। यह सब लिखने के पीछे का उद्देँशय यही है कि नक़ल आप करें तो उसमे अकल भी लगा लिया करें। उनके यहाँ साधारणतया शादियाँ नहीं होती है और जो शादी करते हैं वो वैलेंटाइन डे मनाते हैं लेकिन हम भारत में क्यों मनाए जा रहे हैं?
जय हिंद!
राजीव दीक्षित
सौजन्य: स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ

सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

फ़िर निर्मल

फ़िर वही निर्मल बाबा
आज समाचार खोज अभियान के अन्तर्गत ‘न्यूज़ 24' चैनल लग गया। वहां ‘विज्ञापन दाता’ के रूप में निर्मल बाबा (?) एक अन्तराल के बाद दिखा। अब आप क्या कहेंगे! कोई फ़र्क पड़ा इतनी किट-किट का...
धन की खातिर यह मीडिया कुछ भी करने को तैयार रहेगा...दुष्ट लोग भ्रम फ़ैलाकर अपना उल्लू सीधा करते रहेंगे।
कमाई से ऊपर उठकर अपनी जिम्मेदारी कब समझी जाएगी?

सोमवार, 28 जनवरी 2013

बैण्ड

अपना ‘बैण्ड’ बजाएं
अंग्रेजों की सेना जब भारत में आयी तो उनके ब्रास बैण्ड भी साथ में आये। उनको भारत के राजाओं पर हमला करना होता था तब उनका ब्रास बैण्ड बजता रहता था। बाद में जब अंग्रेज गये तो वह ब्रास बैण्ड को यहीं छोड़ गये और हमने उसको बजाना शुरू कर दिया शादी, बारातों और अनेक शुभ अवसरों पर। वैदिक और दूसरी पद्धतियों में होने वाले विवाह में जो पश्चिम की नक़ल है वह है ब्रास बैण्ड बजाकर बारात लेकर जाना।
यह पूरी की पूरी अंग्रेजों की नक़ल है। यूरोप में यह परंपरा है, खासकर इंग्लैण्ड, आयरलैण्ड, स्कॉट्लैण्ड में। यह ब्रास और बैण्ड तब बजाया जाता है जब दुश्मन पर हमला करने के लिए जाया जाता है और सेना के आगे-आगे चल कर जाते हैं ताकि सेना में जोश भरे, उत्साह भरे और दुश्मन पर जाके टूट पड़े, हमला करे। यहाँ मूर्ख भारतवासी शादियों में बारात में वो ब्रास बैण्ड लेकर जाते हैं। पता नहीं किस दुश्मन पर हमला करने जा रहे हैं!
भारत में हर शुभ अवसर पर या काम में शहनाई बजती है तो शहनाई बजाइए, बांसुरी बजाइए पर बेसुरा ब्रास बैण्ड बजाना बन्द करिए।
दिये गए लिंक पर जाकर वीडियो देखे : http://www.youtube.com/watch?v=MWL8_wGCbMQ

गुरुवार, 17 जनवरी 2013

जय इण्डिया

जय हिन्द

रविवार, 2 दिसंबर 2012

लकड़ी

गैस नहीं तो लकड़ी चलेगी

मंगलवार, 27 नवंबर 2012

स्वदेशी

स्वदेशी अपनाएं, देश बचाएं
हिन्दुस्तान यूनिलीवर नाम की बहुराष्ट्रीय कम्पनी भारत में सबसे अधिक लूटने वाली विदेशी कंपनियों में से एक है। इस कम्पनी द्वारा भारत में लूट के नये-नये तरीके खोजने के लिए कई रिसर्च (R & D) केंद्र स्थापित किये हुए हैं। किसानों तथा देश की जनता के साथ खिलवाड़ करने वाली इस लुटेरी कम्पनी के सभी उत्पादों का  बहिष्कार करें तथा स्वदेशी कम्पनियों के उत्पादों को अपनाएं।
हिन्दुस्तान यूनिलीवर के उत्पाद निम्न हैं-
• अन्नपूर्णा नमक तथा आटा, • ब्रू कॉफी, • ब्रुक बोंड चाय, • ताजमहल चाय,  रेड लेबल चाय, • किसान केचप, • किसान जेम, • लिप्टन चाय, • नोर नूडल्स, • क्वालिटी वाल्स आइसक्रीम, • मोडर्न ब्रेड, • एक्टिव व्हील डिटरजेंट, • सिफ क्रीम क्लीनर, • कम्फर्ट फेब्रिक सॉफ्टनर, • डोमेक्स टॉयलेट क्लीनर, • रिन डिटरजेंट व सोप, • सर्फ़ एक्सेल डिटरजेंट, • विम डिशवाश, • एक्स डियोडरेंट व लोशन, • ब्रीज सोप, • क्लियर एंटी डेंड्रफ शेम्पू व हेयर प्रॉडक्ट्स, • क्लिनिक प्लस शेम्पू व तेल, • क्लोजअप टूथपेस्ट, • डव सोप, • हेयर केयर लोशन, डियोडरेंट व क्रीम, • डेनिम शेविंग क्रीम, • फेयर एंड लवली, • फेयर एंड हेंडसम, • हमाम, • लेक्मे ब्यूटी प्रोडक्ट्स, • लाइफबॉय सोप एंड हैण्ड वाश, • लिरिल २००० सोप, • लक्स सोप, • पीयर्स सोप, • पेप्सोडेंट टूथपेस्ट, • पोंड्स टेल्कम पाउडर एंड क्रीम्स, • रेक्सोना सोप, • सनसिल्क शेम्पू, • वेसलीन पेट्रोलियम जेली, स्किन केयर लोशन आदि।
http://www.youtube.com/watch?v=rOM9QF3w0r0 http://www.youtube.com/watch?v=GBvbBBUhZ1Y http://www.youtube.com/watch?v=XmzcYwFyObc&feature=related
http://www.facebook.com/BE.INDIAN.BUY.NDIAN.RAJIVDIXIT?ref=stream

रविवार, 30 सितंबर 2012

परहेज

अखबार और कार्टून



















मुद्दे की बात यह है कि हर अखबार-पत्रिका में एकाधिक कार्टून अनिवार्य रूप से छपने चाहिए। इसके लिए एक सजग पाठक और कार्टून प्रेमी होने के नाते के नाते आप जो अखबार लेते हैं उसे नियमित रूप से अलग-अलग कार्टूनिस्टों के बनाए अधिक कार्टून छापने के लिए पत्र लिखें, ई-मेल करें... लिखते रहें,करते रहें।

आज का अखबार देखा। कई बार सोचा कि विज्ञापन और पठनीय (?) सामग्री का अनुपात देखा जाए। २ रुपये से ४.५० रुपये में बदले हुए दिल्ली के दैनिक हिन्दुस्तान में आज २०+४ (मूवी मैज़िक- कुछ छोटे आकार के पृष्ठ)+१० (सर्च इंजन- वर्गीकृत/डिस्प्ले विज्ञापन)=३४ पृष्ठ हैं। कुल मुद्रित क्षेत्र (प्रिण्ट एरिया) है- लगभग ५६६८९२ वर्ग सेमी.। इसमें विज्ञापन ३३४७७.७ वर्ग सेमी क्षेत्र में छपे हैं, जब कि पठनीय (?) सामग्री २३२११.५ वर्ग सेमी. छपी है। इस तरह अखबार में लगभग ५९.०५ % विज्ञापन हैं और ४०.९५% सामग्री। यह सिर्फ़ एक अखबार के एक संस्करण की तस्वीर है।

पूरे अखबार में सम्पादकीय पृष्ठ पर एक कार्टून है। पहले पन्ने का पॉकेट कार्टून बन्द कर दिया गया है। भीतर एक कार्टून छपता है छपता है जो प्राय: गायब रहता है। फ़िल्म-टीवी और ऐसी ही तमाम सामग्री आवश्यक रूप से मौजूद रहती है- पाठकों की रुचि के नाम पर। रविवारीय अंक का पहले इन्तज़ार रहता थ, उसे प्राय: संजोकर रखा जाता था। और अब, रविवार को मैं सबसे पहले अपने अखबार के परिशिष्ट ‘मूवीमैज़िक’ को अखबार से निकालकर दूर रख देता हूं। एक पाठक के नाते मैं ऐसा कर सकता हूं।

क्या साधन सम्पन्न इस अखबार में देश के कुछ कार्टूनिस्टों के गैर राजनीतिक यानी पारिवारिक सामाजिक नहीं छापे जा सकते! कमोवेश यही हाल देश के अन्य छोटे-बड़े अखबारों का भी है। सभी ‘पाठकों की पसन्द’ की सामग्री छाप रहे हैं और पता नहीं इन्हें पाठकों की पसन्द पता कैसे चलती है?

मुद्दे की बात यह है कि हर अखबार-पत्रिका में एकाधिक कार्टून अनिवार्य रूप से छपने चाहिए। इसके लिए एक सजग पाठक और कार्टून प्रेमी होने के नाते के नाते आप जो अखबार लेते हैं उसे नियमित रूप से अलग-अलग कार्टूनिस्टों के बनाए अधिक कार्टून छापने के लिए पत्र लिखें, ई-मेल करें... लिखते रहें,करते रहें।

हो सकता है आपको लगे मैं स्वार्थी हूं और मैं अपनी बात थोप रहा हूं। बिल्कुल, मैं स्वार्थी हूं- कार्टून, कार्टून कला और कार्टूनिस्टों के हित में (इनमें मैं भी शामिल हूं) मुझे यह भी स्वीकार है! आप साथ हैं तो आप और हम मिलकर स्थिति बदल सकते हैं।

(ऊपर दिए आंकड़े अनुमानित हैं इन्हें मानक न मानें- बस थोड़ी जानकारी साझा करने के लिए सिर खपाई की गयी है।)

• कार्टूनिस्ट चन्दर

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कार्टून न्यूज़ हिन्दी

सोमवार, 27 अगस्त 2012

चूल्हा


जरूरी नहीं गैस कनेक्शन के साथ चूल्हा खरीदना
कोई गैस एजैन्सी उपभोक्ता को नये कनेक्शन के साथ अपने यहां से 
गैस चूल्हा खरीदने को विवश नहीं कर सकतीं।
गैस एजेन्सियां नया गैस कनेक्शन लेने पर उपभोक्ता को अनिवार्य बताते हुए गैस चूल्हा भी खरीदने को विवश करती हैं, ऐसी शिकायतें प्राय: सुनने-देखने को मिलती हैं। अब आईओएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने अपने वितरकों से से ऐसा न करने को कहा है। हमारे यहां ईंडेन, एचपी गैस और भारत नाम से रसोई गैस उपलब्ध कराई जाती है। नया गैस कनेक्शन मिलने पर सम्बन्धित एजेन्सी लगभग हर उपभोक्ता को अपने यहां से गैस स्टोव या चूल्हा खरीदने को विवश करती है जो बाज़ार से काफ़ी महंगा (और प्राय: हल्का भी) होता है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता को गैस एजेंसी से बिना चूल्हा खरीदे गैस कनेक्शन न देने की बात लिखकर देने को जोर देना चाहिए।
कोई गैस एजेन्सी ऐसा लिखकर देने को तैयार नहीं होगी। गैस कनैक्श लेने के लिए अधिक उतावलापन न दिखते हुए सम्बन्धित गैस कम्पनी से एजैन्सी की लिखित शिकायत करनी चाहिए। उललेखनीय है कि कोई गैस एजैन्सी उपभोक्ता को नये कनेक्शन के साथ अपने यहां से गैस चूल्हा खरीदने को विवश नहीं कर सकतीं।
 कुछ साल पहले मुझे जब ईंडेन का गैस कनेक्श न मिला ता सम्बन्धित गैस एजेंसी ने अपने यहां से गैस चूल्हा खरीदने के लिए मुझ पर काफी दवाब डाला। मेरे सामने आये 2 उपभोक्ताओं को काफी महंगा गैस चूल्हा भेड़ दिया गया। चूल्हा खरीदने की अनिवार्यता के बारे में लिखित में देने को गैस एजेंसी तैयार नहीं हुई। मुझसे धीरे से कहा गया कि चूल्हा साथ बेचने से कुछ आमदनी हो जाती है। गैस कनेक्शन और सिलेण्डर की सप्लाई पर कमीशन बहुत कम है। मुझे बाजार से खरीदे गयेआईएसआई मार्क वाले गैस चूल्हे की रसीद की रसीद दिखने को कहा गया। रसीद दिखाने पर एजेंसी का कर्मचारी चूल्हे की जांच करने मेरे घर भी आया जिसका शुल्क मुझे देना पड़ा।
• ईंडेन http://indane.co.in/    https://iocl.com/Products/indanegas.aspx 
• भारत गैस http://www.ebharatgas.com/
• एचपी गैस http://www.hindustanpetroleum.com