शिकायत बोल
शिकायत बोलऐसा कौन होगा जिसे किसी से कभी कोई शिकायत न हो। शिकायत या शिकायतें होना सामान्य और स्वाभाविक बात है जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। हम कहीं जाएं या कोई काम करें अपनों से या गैरों से कोई न कोई शिकायत हो ही जाती है-छोटी या बड़ी, सहनीय या असहनीय। अपनों से, गैरों से या फ़िर खरीदे गये उत्पादों, कम्पनियों, विभिन्न सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की सेवाओं, लोगों के व्यवहार-आदतों, सरकार-प्रशासन से कोई शिकायत हो तो उसे/उन्हें इस मंच शिकायत बोल पर रखिए। शिकायत अवश्य कीजिए, चुप मत बैठिए। आपको किसी भी प्रकार की किसी से कोई शिकायत हो तोर उसे आप औरों के सामने शिकायत बोल में रखिए। इसका कम या अधिक, असर अवश्य पड़ता है। लोगों को जागरूक और सावधान होने में सहायता मिलती है। विभिन्न मामलों में सुधार की आशा भी रहती है। अपनी बात संक्षेप में संयत और सरल बोलचाल की भाषा में हिन्दी यूनीकोड, हिन्दी (कृतिदेव फ़ोन्ट) या रोमन में लिखकर भेजिए। आवश्यक हो तो सम्बधित फ़ोटो, चित्र या दस्तावेज जेपीजी फ़ार्मेट में साथ ही भेजिए।
मंगलवार, 2 जुलाई 2013
सोमवार, 1 जुलाई 2013
बुधवार, 1 मई 2013
ग्राहक
जागो ग्राहक जागो
कैसे बचे असंगठित अपभोक्ता
कोई भी वस्तु अगर आप बारह या पंद्रह रुपये की खरीदें तो दुकानदार कहता है कि पूरे 20 रुपये की कर दें? केवल रेहड़ी वाले ही नहीं बल्कि अच्छी-भली व बड़ी दुकानों वाले भी आजकल पांच-सात, दो-चार यहां तक कि दस रुपये बकाया होने पर ग्राहक को पैसे लौटाने के बजाए उन्हें टाफ़ी,गोली या माचिस आदि थमाकर चलता कर देते हैं।
• निर्मल रानीमिठाई के साथ मिठाई के डिब्बों का वज़न न किए जाने के प्राय: सरकार द्वारा निर्देश जारी किए जाते हैं.परंतु आज शायद ही कोई ऐसा मिठाई विक्रेता हो जो डिब्बों का वज़न मिठाई के साथ न करता हो। यही नहीं बल्कि गत्ते के डिब्बे के दोनों भाग एक साथ जोडक़र उसमें मिठाई रखी जाती है। यानी एक ओर तो मिठाई की कीमतें आसमान छू रही हैं दूसरी ओर आपको मिठाई के रेट में ही गत्ते के डिब्बे को भी खरीदना पड़ रहा है। यह बात यहीं ख्त्म नहीं होती.बल्कि अब तो मिठाई के डिब्बों का वज़न बढ़ाने के लिए डिब्बों के भीतर भी तरह-तरह की कलाकारियां की जा रही हैं।
डिब्बों में बाकायदा अलग-अलग भाग बनाए जाते है तथा उनमें अलग-अलग तरह की मिठाई प्रत्येक भाग में रखी जाती है। इसके लिए अतिरिक्त गत्ते के डिब्बे में रखा जाता है। कई बार ऐसा भी हुआ कि मिठाई के डिब्बे के निचले हिस्से में काफी मोटे गत्ते का बड़ा टुकड़ा बेवजह रखा पाया गया। सवाल यह है कि प्रशासन की नाक तले पूरे देश में हर वक्त चलने वाले इस लूट के धंधे से क्या प्रशासन बेखबर है? आखिर सरकार व प्रशासन की अनदेखी का ही परिणाम है कि आज असंगठित उपभोक्ता कभी मिलावटी, नक़ली व ज़हरीली मिठाई खरीदने को मजबूर रहता है तो कभी उसे उसकी अदा की हुई क़ीमत के बराबर के वज़न की मिठाई भी मयस्सर नहीं हो पाती।इसी प्रकार तमाम फल व सब्ज़ी वालों ने आजकल ग्राहकों को लूटने का एक नया तरीका निकाल रखा ह। उदाहरण के तौर पर पचास रुपये किलो बिकने वाला आम यदि दुकानदार एक किलो का मूल्य पचास रुपये मांगता है तो वह उसी आम को दो किलो लेने पर ग्राहक को 90 रुपये देने की बात करता है। परंतु यदि ग्राहक दुकानदार से पैंतालिस रुपये का एक किलो आम देने को कहता है तो वह दुकानदार मना कर देता है।
| ६ माह में ४ बार बदली गयी सीएफ़एल अन्त में परेशान दुकानदार ने हाथ जोड़ दिए। कम्पनी ने शिकायत का कोई जवाब नहीं दिया। |
यही हाल ज़्यादातर सब्ज़ी व फल बेचने वालों की दुकानों पर देखा जा सकता है.कोई भी वस्तु अगर आप बारह या पंद्रह रुपये की खरीदें तो दुकानदार कहता है कि पूरे 20 रुपये की कर दें? केवल रेहड़ी वाले ही नहीं बल्कि अच्छी-भली व बड़ी दुकानों वाले भी आजकल पांच-सात, दो-चार यहां तक कि दस रुपये बकाया होने पर ग्राहक को पैसे लौटाने के बजाए उन्हें टाफ़ी, गोली या माचिस आदि थमाकर चलता कर देते हैं.यह उपभोक्ताओं के साथ होने वाली खुली लूट नहीं तो और क्या है?
अंसगठित उपभोक्ता को लूटने में केवल मिठाईयों वाले या रेहड़ी वाले ही सक्रिय नहीं हैं बल्कि जानी-मानी बड़ी से बड़ी राष्ट्रीय व बहुराष्ट्रीय कंपनियों से लेकर स्थानीय उत्पादक तक मंहगाई की आड़ में उपभोक्ताओं को दोनों हाथों से लूटने का ज़बरदस्त हथकंडा अपनाए हुए हैं। उदाहरण के तौर पर यदि साबुन या डिटर्जेंट या इस प्रकार की और तमाम वस्तुओं को लिया जाए तो हम यह देखेंगे कि कंपनियों ने मंहगाई के नाम पर ऐसी वस्तुओं की कीमतें तो बढ़ाई ही हैं साथ-साथ उन्होंने अपने इन उत्पादों की पैकिंग का वज़न भी कम कर दिया है। यानी उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ रही है.गोया वह किसी एक वस्तु की कीमत इसलिए ज़्यादा दे रहा है क्योंकि बाज़ार में चीज़ें मंहगी होती जा रही हैं।
आखिर ऐसा क्यों? क्या इन कंपनियों को मात्र मूल्य बढ़ाने भर से संतुष्टि नहीं होती जोकि यह देश के असंगठित उपभोक्ताओं को वस्तु का वज़न भी कम देते हैं? साबुन, पेस्ट, शैंपू, डिटर्जेंट, वाशिंग पाऊडर, रूह अफ़ज़ा जैसे और भी कई उत्पाद इसी श्रेणी में गिने जा सकते हैं जिनके मूल्य भी बढ़ रहे हैं और वज़न भी कम होता जा रहा है।
जबसे मंहगाई बढऩे का सिलसिला शुरु हुआ है तबसे टेलीविज़न पर प्रसारित होने वाली खबरों पर आम दुकानदार भी खासतौर पर नज़रें रखने लगा है। टीवी चैनल्स के मध्य चल रही प्रतिस्पर्धा के वर्तमान दौर में टी वी पत्रकार भी जनता में सनसनी फैलाने के लिए कोई न कोई निराली व ध्यान आकर्षित करने वाली खबरें ढंढते रहते हैं और इसी कड़ी में यदि किसी टीवी चैनल पर मान लीजिए यह ख़बर प्रसारित हो गई कि लखनऊ में टमाटर 60 रुपये किलो की दर से बिक रहा है तो लखनऊ से सात-आठ सौ किलोमीटर दूर हरियाणा व पंजाब का सब्ज़ी विक्रेता भी लखनऊ की इस ख़बर से प्रभावित होकर अपने 20-30 रुपये प्रतिकिलो बिकने वाले टमाटर का मूल्य भी 50-60 रुपये प्रतिकिलो कर देता है।
यदि असंगठित उपभोक्ता उससे यह पूछे कि सुबह तो यही टमाटर तीस रुपये प्रतिकिलो था और अब शाम होते-होते यह पचास व साठ रुपये किलो कैसे हो गया तो इसके जवाब में सब्ज़ी बेचने वाला लखनऊ की मंडी का टमाटर का भाव व उसके टीवी पर प्रसारित होने का हवाला दे बैठता है.गोया अब मंहगाई बढऩे का आधार ख़रीद के लिए दिया जाने वाला अधिक मूल्य नहीं बल्कि सुनी-सुनाई बातें, अफवाहें तथा रेडियो व टीवी के समाचार आदि हो कर रह गए हैं।
अधिक मुनाफ़ा कमाने के लिए दुकानदार ग्राहाकों के साथ एक और अन्याय यह कर रहे हैं कि वे सस्ती, घटिया व अधिक मुनाफ़ा देने वाली तमाम वस्तुओं को ग्राहकों के हाथों बेचकर ख़ुश नज़र आते हैं। जबकि टिकाऊ, अच्छी, ब्रांडेड वस्तुएं ऐसे दुकानदार बेचना इसलिए पसंद नहीं करते क्योंकि इनमें मुनाफ़ा कम मिलता ह। मिसाल के तौर पर एक माचिस की डब्बी को ही ले लीजिए.इस समय देश में सबसे प्रतिष्ठित माचिस निर्माता कंपनी विम्को ही मानी जाती है।
उत्तर भारत में इसके दो ब्रांड होमलाईट व शिप अत्यधिक लोकप्रिय हैं। परंतु अधिकांश दुकानदार माचिस मांगने पर ग्राहक को इस ब्रांड की माचिस देने के बजाए दूसरे घटिया ब्रांड की माचिस थमा देते हैं। हालांकि उनकी कीमत भी दुकानदार वही वसूलते हैं जो शिप या होमलाईट माचिस की होती है। परंतु चूंकि विम्को जैसी कंपनियां दुकानदार को कमीशन कम देती हैं और ग्राहक की सुविधा व ज़रूरत के अनुसार अपना अच्छा उत्पाद तैयार करती हैं इसलिए दुकानदार इन्हें कम बेचता है व घटिया उत्पाद अधिक।इसका नतीजा यह होता है कि दूसरी माचिस जल्दी खत्म हो जाती है। कभी-कभी एक तीली इस्तेमाल करने की जगह चार-पांच तीलियां इस्तेमाल करनी पड़ती हैं तो कभी घटिया माचिस को इस्तेमाल करते समय इसकी चिंगारी छिटककर माचिस जलाने वाले व्यक्ति पर या उसके पास बैठे किसी अन्य व्यक्ति के कपड़ों पर जा गिरती है। इस तरह सस्ती माचिस प्रयोग करने के ‘इनाम स्वरूप’ उपभोक्ता के कीमती कपड़े तक जल जाते हैं।
मगर ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने की चाहत रखने वाले दुकानदारों का इन बातों से क्या वास्ता? उन्हें तो महज़ अपनी ज़्यादा कमाई से ही मतलब होता है न कि भगवान का रूप समझे जाने वाले ग्राहकों की सुविधा या उसकी संतुष्टि से.इसी प्रकार और भी तमाम हथकंडे ऐसे हैं जिन्हें अपनाकर दुकानदारों द्वारा असंगठित उपभोक्ताओ को लूटने का खुला प्रयास किया जा रहा है। इनमें कम तौलना,मिलावटी सामान बेचना, सड़ी-गली व बासी चीज़ें ग्राहकों के हाथों बेच देना, ज़रूरत से अधिक कीमत वसूलना, मांगी गई वस्तु से अधिक वस्तु ग्राहक को ज़बरदस्ती लेने के लिए मजबूर कर देना जैसी तमाम बातें शामिल हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि मंहगाई के वर्तमान दौर में असंगठित उपभोक्ता दोनों हाथों से लूटा जा रहा है और सरकार,शासन व प्रशासन मूक दर्शक बना सबकुछ देख रहा है.

निर्मल रानी उपभोक्ता मामलों की विशेषज्ञ हैं|
साभार: जनज्वार
बुधवार, 24 अप्रैल 2013
चालान
चालान-चालान

• यदि आप भूलवश अपना कोई दस्तावेज साथ नहीं लाए हैं और वाहन चैकिंग के दौरान पकड़े गए हैं तो कैश चालान भरने के बजाए आप अपना चालान कटवा लें। क्योंकि अगले 15 दिन तक आप असली दस्तावेज दिखाकर और 100 रुपये की फीस जमाकर चालान को निरस्त करवा सकते हैं। ध्यान रखें, यदि आपने कैश चालान कटवा लिया है तो वह निरस्त नहीं हो सकता। यह सही और जरूरी जानकारी अपने मित्रों से साझा कर आप उन्हें वाहन जांच
नोटः अलग-अलग राज्यों में चालान की राशि और चालान निरस्त करने की फीस अलग-अलग हो सकती है, इसलिए अपने राज्य के हिसाब से सही जानकारी हासिल करें। चालान कटने के 15 दिन के अंदर असली दस्तावेज दिखाकर निरस्त करवाया जा सकता है।
(यह जानकारी उत्तर प्रदेश के लिए है।) महत्वपूर्ण जरुरी सूचना जनहित में शेयर करें तथा भ्रष्टाचार को रोकने में मदद करें।
यह जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त की गयी है।
लिन्क: http://www.facebook.com/InfoLinkZone

एक
RTI से मिली जानकारी के अनुसार यदि वाहन की जाँच के समय चालक के पास मूल
दस्तावेज (लायसेंस, बीमा, फिटनेस इत्यादि) नहीं हैं, तो उसे वह दस्तावेज
पेश करने के लिए १५ दिनों का समय मिलता है. यहाँ तक कि वह सारे दस्तावेजों
की फोटोकापी, किसी राजपत्रित अधिकारी से सत्यापित करवाकर यातायात विभाग को
पंजीकृत डाक से भी भेज सकता है...
-----------------------------
• यदि आप भूलवश अपना कोई दस्तावेज साथ नहीं लाए हैं और वाहन चैकिंग के दौरान पकड़े गए हैं तो कैश चालान भरने के बजाए आप अपना चालान कटवा लें। क्योंकि अगले 15 दिन तक आप असली दस्तावेज दिखाकर और 100 रुपये की फीस जमाकर चालान को निरस्त करवा सकते हैं। ध्यान रखें, यदि आपने कैश चालान कटवा लिया है तो वह निरस्त नहीं हो सकता। यह सही और जरूरी जानकारी अपने मित्रों से साझा कर आप उन्हें वाहन जांच
नोटः अलग-अलग राज्यों में चालान की राशि और चालान निरस्त करने की फीस अलग-अलग हो सकती है, इसलिए अपने राज्य के हिसाब से सही जानकारी हासिल करें। चालान कटने के 15 दिन के अंदर असली दस्तावेज दिखाकर निरस्त करवाया जा सकता है।
(यह जानकारी उत्तर प्रदेश के लिए है।) महत्वपूर्ण जरुरी सूचना जनहित में शेयर करें तथा भ्रष्टाचार को रोकने में मदद करें।
यह जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त की गयी है।
लिन्क: http://www.facebook.com/InfoLinkZone
लेबल:
bharat,
challan,
documents,
india,
vehicle checking,
vehicle documents
मंगलवार, 23 अप्रैल 2013
धोखाकोला
पेप्सी और कोका कोला में है क्या
• राजीव दीक्षित
http://www.facebook.com/BE.INDIAN.BUY.NDIAN.RAJIVDIXIT
• कार्बन डाईऑक्साइड - जो कि बहुत जहरीली गैस है और जिसको कभी भी शरीर के अन्दर नहीं ले जाना चाहिए और इसीलिए इन कोल्ड ड्रिंक्स को "कार्बोनेटेड वाटर" कहा जाता है | और इन्ही जहरों से भरे पेय का प्रचार भारत के क्रिकेटर और अभिनेता/अभिनेत्री करते हैं पैसे के लालच में, उन्हें देश और देशवाशियों से प्यार होता तो ऐसा कभी नहीं करते |
• तथ्य ये कि टॉयलेट क्लीनर harpic और पेप्सी-कोक की Ph value एक ही है | मैं आपको सरल भाषा में समझाने का प्रयास करता हूँ | Ph एक इकाई होती है जो acid की मात्रा बताने का काम करती है !और उसे मापने के लिए Ph मीटर होता है | शुद्ध पानी का Ph सामान्यतः 7 होता है ! और (7 Ph) को सारी दुनिया में सामान्य माना जाता है, और जब पानी में आप हाईड्रोक्लोरिक एसिड या सल्फ्यूरिक एसिड या फिर नाइट्रिक एसिड या कोई भी एसिड मिलायेंगे तो Ph का वैल्यू 6 हो जायेगा, और ज्यादा एसिड मिलायेंगे तो ये मात्रा 5 हो जाएगी, और ज्यादा मिलायेंगे तो ये मात्रा 4 हो जाएगी, ऐसे ही करते-करते जितना acid आप मिलाते जाएंगे ये मात्रा कम होती जाती है | जब पेप्सी-कोक के एसिड का जाँच किया गया तो पता चला कि वो 2.4 है और जो टॉयलेट क्लीनर होता है उसका Ph और पेप्सी-कोक का Ph एक ही है, 2.4 का मतलब इतना ख़राब जहर कि आप टॉयलेट में डालेंगे तो ये झकाझक सफ़ेद हो जायेगा |
भारत के कई वैज्ञानिकों ने पेप्सी और कोका कोला पर रिसर्च करके बताया कि इसमें मिलाते क्या हैं| पेप्सी और कोका कोला वालों से पूछिए तो वो बताते नहीं हैं, कहते हैं कि ये फॉर्मूला टॉप सेक्रेट है, ये बताया नहीं जा सकता| लेकिन आज के युग में कोई भी सेक्रेट को सेक्रेट बना के नहीं रखा जा सकता। वैज्ञानिकों ने अध्ययन कर के बइसमे कुल 21 तरह के जहरीले कैमिकल मिलाये जाते हैं ! कुछ नाम बताता हूँ !इसमें पहला जहर जो मिला होता है- सोडियम मोनो ग्लूटामेट, और वैज्ञानिक कहते हैं कि ये कैंसर करने वाला रसायन है, फिर दूसरा जहर है- पोटैसियम सोरबेट - ये भी कैंसर करने वाला है, तीसरा जहर है - ब्रोमिनेटेड वेजिटेबल ऑइल (BVO)- ये भी कैंसर करता है | चौथा जहर है- मिथाइल बेन्जीन - ये किडनी को ख़राब करता है, पाँचवा जहर है - सोडियम बेन्जोईट- ये मूत्र नली का, लीवर का कैंसर करता है, फिर इसमें सबसे ख़राब जहर है- एंडोसल्फान- ये कीड़े मारने के लिए खेतों में डाला जाता है और ऊपर से होता है ऐसे करते करते इस में कुल 21 तरह के जहर मिलाये जाते हैं !
जानिए, इसमें मिलाते क्या हैं। ये 21 तरह के जहर तो एक तरफ है और हमारे देश के पढ़े लिखे लोगो के दिमाग का हाल देखिये -बचपन से उन्हे किताबों मे पढ़ाया जाता है ! की मनुष्य को प्राण वायु आक्सीजन अंदर लेनी चाहिए और कार्बन डाईऑक्साइड बाहर निकलनी चाहिए ये जानने के बावजूद भी गट गट कर उसे पे रहे हैं! और पीते ही एक दम नाक मे जलन होती और वो सीधा दिमाग तक जाती है! और फिर दूसरा घूट भरते हैं गट-गट-गट !
और हमारा दिमाग इतना गुलाम हो गया है! आज हम किसी बिना coke pepsi के जहर के किसी भी शादी विवाह पार्टी के बारे मे सोचते भी नही! कार्बन डाईऑक्साइड- जो कि बहुत जहरीली गैस है और जिसको कभी भी शरीर के अन्दर नहीं ले जाना चाहिए और इसीलिए इन कोल्ड ड्रिंक्स को "कार्बोनेटेड वाटर" कहा जाता है | और इन्ही जहरों से भरे पेय का प्रचार भारत के क्रिकेटर और अभिनेता/अभिनेत्री करते हैं पैसे के लालच में, उन्हें देश और देशवाशियों से प्यार होता तो ऐसा कभी नहीं करते |
पहले आमिर खान ये जहर बिकवाता था अब उसका भांजा बिकवाता है! अमिताभ बच्चनशारूखान ,रितिक रोशन...लगभग सबने इस कंपनी का जहर भारत मे बिकवाया है! क्यूंकि इनके लिए देश से बड़ा पैसा है !
पूरी क्रिकेट टीम इस दोनों कंपनियो ने खरीद रखी है! और हमारी क्रिकेट टीम कप्तान धोनी जब नये-नये आये थे! तब मीडिया मे ऐसे खबरे आती थी ! रोज 2 लीटर दूध पीते हैं धोनी ! ये दूध पीकर धोनी बनने वाला धोनी आज पूरे भारत को पेप्सी का जहर बेच रहा है ! और एक बात ध्यान दे जब भी क्रिकेट मैच की दौरान water break होती है तब इनमे से कोई खिलाड़ी pepsi coke क्यूँ नहीं पीता ? क्यूँ कि ये सब जानते है ये जहर है ! इन्हे बस ये देश वासियो को पिलाना है !
ज्यादातर लोगों से पूछिए कि "आप ये सब क्यों पीते हैं ?" तो कहते हैं कि "ये बहुत अच्छी क्वालिटी का है" | अब पूछिये कि "अच्छी क्वालिटी का क्यों है" तो कहते हैं कि "अमेरिका का है"| और ये उत्तर पढ़े-लिखे लोगों के होते हैं |
तो ऐसे लोगों को ये जानकारी दे दूँ कि अमेरिका की एक संस्था है FDA (Food and Drug Administration) और भारत में भी ऐसी ही एक संस्था है, उन दोनों के दस्तावेजों के आधार पर मैं बता रहा हूँ कि, अमेरिका में जो पेप्सी और कोका कोला बिकता है और भारत में जो पेप्सी-कोक बिक रहा है, तो भारत में बिकने वाला पेप्सी-कोक, अमेरिका में बिकने वाले पेप्सी-कोक से 40 गुना ज्यादा जहरीला होता है, सुना आपने ? 40 गुना, मैं प्रतिशत की बात नहीं कर रहा हूँ | और हमारे शरीर की एक क्षमता होती है जहर को बाहर निकालने की, और उस क्षमता से 400 गुना ज्यादा जहरीला है, भारत में बिकने वाला पेप्सी और कोक | तो सोचिए बेचारी आपकी किडनी का क्या हाल होता होगा !जहर को बाहर निकालने के लिए !ये है पेप्सी-कोक की क्वालिटी, और वैज्ञानिकों का कहना है कि जो ये पेप्सी-कोक पिएगा उनको कैंसर, डाईबिटिज, ओस्टियोपोरोसिस, ओस्टोपिनिया, मोटापा, दाँत गलने आदि जैसी 48 बीमारियाँ होगी|
पेप्सी-कोक के बारे में आपको एक और जानकारी देता हूँ - स्वामी रामदेव जी इसे टॉयलेट क्लीनर कहते हैं, आपने सुना होगा (ठंडा मतलब टाइलेट कालीनर ) तो वो कोई इसको मजाक में नहीं कहते या उपहास में नहीं कहते हैं,देश के पढ़े लिखे मूर्ख लोग समझते है कि ये बात किसी ने ऐसे ही बना दी है!
इसके पीछे तथ्य है, ध्यान से पढ़े! तथ्य ये कि टॉयलेट क्लीनर harpic और पेप्सी-कोक की Ph value एक ही है | मैं आपको सरल भाषा में समझाने का प्रयास करता हूँ | Ph एक इकाई होती है जो acid की मात्रा बताने का काम करती है !और उसे मापने के लिए Ph मीटर होता है | शुद्ध पानी का Ph सामान्यतः 7 होता है ! और (7 Ph) को सारी दुनिया में सामान्य माना जाता है, और जब पानी में आप हाईड्रोक्लोरिक एसिड या सल्फ्यूरिक एसिड या फिर नाइट्रिक एसिड या कोई भी एसिड मिलायेंगे तो Ph का वैल्यू 6 हो जायेगा, और ज्यादा एसिड मिलायेंगे तो ये मात्रा 5 हो जाएगी, और ज्यादा मिलायेंगे तो ये मात्रा 4 हो जाएगी, ऐसे ही करते-करते जितना acid आप मिलाते जाएंगे ये मात्रा कम होती जाती है | जब पेप्सी-कोक के एसिड का जाँच किया गया तो पता चला कि वो 2.4 है और जो टॉयलेट क्लीनर होता है उसका Ph और पेप्सी-कोक का Ph एक ही है, 2.4 का मतलब इतना ख़राब जहर कि आप टॉयलेट में डालेंगे तो ये झकाझक सफ़ेद हो जायेगा | इस्तेमाल कर के देखिएगा।
और हम लोगो का हाल ये है ! घर मे मेहमान के आते ही ये जहर उसके आगे करते हैं! दोस्तो, हमारी महान भारतीय संस्कृति मे कहा गया है ! अतिथि देवो भव ! मेहमान भगवान का रूप है ! और आप उसे टॉइलेट क्लीनर पिला रहे हैं!
अंत मे राजीव भाई कहते हैं ! कि देश का युवा वर्ग सबसे ज्यादा इस जहर को पीता! और नपुंसकता कि बीमारी सबसे ज्यादा ये जहर पीकर हो रही है ! और कहीं न कहीं मुझे लगता है! ये pepsi coke पूरी देश पूरी जवान पीढ़ी को खत्म कर देगा ! इस लिए हम सबको मिलकर स्कूलों कालेजो मे जा जा कर बच्चो को समझाना चाहिए! आप बस स्कूल कालेजो मे जाते ही उनके सामने इस pepsi coke से वहाँ का टाइलेट साफ कर के दिखा दीजिए! एक मिनट में ही वो मान जाएंगे! और बच्चे अगर मान गये तो उनके घर वाले खुद पर खुद मान जाएंगे! वो एक कहावत हैं न son is a father of father ! बच्चा बाप का बाप होता है ! तो बच्चो को समझाये ! बच्चे ये जहर पीना छोड़ें, बड़े छोड़े और इन दोनों अमेरीकन कंपनियो को अपने देश भगायें !
राजीव भाई कहते हैं 1997 मे जब उन्होने पेप्सी और कोक के खिलाफ अभियान शुरू किया था तो वो अकेले थे लेकिन आज भारत में 70 संस्थाएं हैं जो पेप्सी-कोक के खिलाफ अभियान चला रहीं हैं, हम खुश हैं कि इनके बिक्री में कमी आयी है | और इनकी बिक्री 60% कम हुई ! 1997 मे ये दोनों कंपनिया कुल 700 करोड़ बोतल बेचती थी ! और आज भी बहुत ज्यादा है ! लेकिन अगर हम सब संकल्प ये जहर न खुद पीएंगे न किसी को पिलाएंगे तो ये 50 करोड़ बोतले बिकनी भी बंद हो जायगी!और ये दोनों कंपनिया अपने देश अमेरिका भाग जाएंगी !
यहाँ जरूर जरूर click करे !
http://www.youtube.com/ watch?v=XmzcYwFyObc
• खिलाड़ी, फ़िल्मी सितारे और कुछ अन्य मशहूर लोग हमारे आदर्श नहीं हो सकते। ये लोग हमारे मित्र नहीं हैं। इनका काम है अपरोक्ष रूप से हमारा शोषण करने में हमारे स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही अनेक कम्पनियों को सहयोग देना और खुद करोड़ों कमाना। हम कब यह सब समझेंगे। शान या स्टेटस की खातिर ये खतरनाक शीतल पेय पीना बन्द कीजिए, मुफ़्त का माल हो तब भी। दावतों में मेहमानों को ऐसे पेय पिलाकर उनके साथ धोखा आखिर क्यों किया जाता है! तमाम नकली शीतल पेयों को मंगाना, पीना-पिलाना बन्द कीजिए औरों को भी प्रेरित कीजिए!
• इसके अलावा इन कम्पनियों ने पैट बोतलों के रूप में हर गांव-शहर को अपनी चपेट में ले लिया है। जमीन की तहों में पिचकी बोतलें शामिल हो गयी हैं। अक्सर लापरवाही से फ़ैंकी गयी ये बोतलें दुर्घटना का कारण भी बन जाती हैं।
• सुराही, घड़ा और अन्य बरतनों की जगह ये पैट बोतलें जमकर उपयोग की जा रही हैं। हमारे ये कृत्य निश्चय ही पर्यावरण के विरुद्ध हैं।
• राजीव दीक्षित
http://www.facebook.com/BE.INDIAN.BUY.NDIAN.RAJIVDIXIT
• कार्बन डाईऑक्साइड - जो कि बहुत जहरीली गैस है और जिसको कभी भी शरीर के अन्दर नहीं ले जाना चाहिए और इसीलिए इन कोल्ड ड्रिंक्स को "कार्बोनेटेड वाटर" कहा जाता है | और इन्ही जहरों से भरे पेय का प्रचार भारत के क्रिकेटर और अभिनेता/अभिनेत्री करते हैं पैसे के लालच में, उन्हें देश और देशवाशियों से प्यार होता तो ऐसा कभी नहीं करते |
• तथ्य ये कि टॉयलेट क्लीनर harpic और पेप्सी-कोक की Ph value एक ही है | मैं आपको सरल भाषा में समझाने का प्रयास करता हूँ | Ph एक इकाई होती है जो acid की मात्रा बताने का काम करती है !और उसे मापने के लिए Ph मीटर होता है | शुद्ध पानी का Ph सामान्यतः 7 होता है ! और (7 Ph) को सारी दुनिया में सामान्य माना जाता है, और जब पानी में आप हाईड्रोक्लोरिक एसिड या सल्फ्यूरिक एसिड या फिर नाइट्रिक एसिड या कोई भी एसिड मिलायेंगे तो Ph का वैल्यू 6 हो जायेगा, और ज्यादा एसिड मिलायेंगे तो ये मात्रा 5 हो जाएगी, और ज्यादा मिलायेंगे तो ये मात्रा 4 हो जाएगी, ऐसे ही करते-करते जितना acid आप मिलाते जाएंगे ये मात्रा कम होती जाती है | जब पेप्सी-कोक के एसिड का जाँच किया गया तो पता चला कि वो 2.4 है और जो टॉयलेट क्लीनर होता है उसका Ph और पेप्सी-कोक का Ph एक ही है, 2.4 का मतलब इतना ख़राब जहर कि आप टॉयलेट में डालेंगे तो ये झकाझक सफ़ेद हो जायेगा |
भारत के कई वैज्ञानिकों ने पेप्सी और कोका कोला पर रिसर्च करके बताया कि इसमें मिलाते क्या हैं| पेप्सी और कोका कोला वालों से पूछिए तो वो बताते नहीं हैं, कहते हैं कि ये फॉर्मूला टॉप सेक्रेट है, ये बताया नहीं जा सकता| लेकिन आज के युग में कोई भी सेक्रेट को सेक्रेट बना के नहीं रखा जा सकता। वैज्ञानिकों ने अध्ययन कर के बइसमे कुल 21 तरह के जहरीले कैमिकल मिलाये जाते हैं ! कुछ नाम बताता हूँ !इसमें पहला जहर जो मिला होता है- सोडियम मोनो ग्लूटामेट, और वैज्ञानिक कहते हैं कि ये कैंसर करने वाला रसायन है, फिर दूसरा जहर है- पोटैसियम सोरबेट - ये भी कैंसर करने वाला है, तीसरा जहर है - ब्रोमिनेटेड वेजिटेबल ऑइल (BVO)- ये भी कैंसर करता है | चौथा जहर है- मिथाइल बेन्जीन - ये किडनी को ख़राब करता है, पाँचवा जहर है - सोडियम बेन्जोईट- ये मूत्र नली का, लीवर का कैंसर करता है, फिर इसमें सबसे ख़राब जहर है- एंडोसल्फान- ये कीड़े मारने के लिए खेतों में डाला जाता है और ऊपर से होता है ऐसे करते करते इस में कुल 21 तरह के जहर मिलाये जाते हैं !
जानिए, इसमें मिलाते क्या हैं। ये 21 तरह के जहर तो एक तरफ है और हमारे देश के पढ़े लिखे लोगो के दिमाग का हाल देखिये -बचपन से उन्हे किताबों मे पढ़ाया जाता है ! की मनुष्य को प्राण वायु आक्सीजन अंदर लेनी चाहिए और कार्बन डाईऑक्साइड बाहर निकलनी चाहिए ये जानने के बावजूद भी गट गट कर उसे पे रहे हैं! और पीते ही एक दम नाक मे जलन होती और वो सीधा दिमाग तक जाती है! और फिर दूसरा घूट भरते हैं गट-गट-गट !
और हमारा दिमाग इतना गुलाम हो गया है! आज हम किसी बिना coke pepsi के जहर के किसी भी शादी विवाह पार्टी के बारे मे सोचते भी नही! कार्बन डाईऑक्साइड- जो कि बहुत जहरीली गैस है और जिसको कभी भी शरीर के अन्दर नहीं ले जाना चाहिए और इसीलिए इन कोल्ड ड्रिंक्स को "कार्बोनेटेड वाटर" कहा जाता है | और इन्ही जहरों से भरे पेय का प्रचार भारत के क्रिकेटर और अभिनेता/अभिनेत्री करते हैं पैसे के लालच में, उन्हें देश और देशवाशियों से प्यार होता तो ऐसा कभी नहीं करते |
पहले आमिर खान ये जहर बिकवाता था अब उसका भांजा बिकवाता है! अमिताभ बच्चनशारूखान ,रितिक रोशन...लगभग सबने इस कंपनी का जहर भारत मे बिकवाया है! क्यूंकि इनके लिए देश से बड़ा पैसा है !
पूरी क्रिकेट टीम इस दोनों कंपनियो ने खरीद रखी है! और हमारी क्रिकेट टीम कप्तान धोनी जब नये-नये आये थे! तब मीडिया मे ऐसे खबरे आती थी ! रोज 2 लीटर दूध पीते हैं धोनी ! ये दूध पीकर धोनी बनने वाला धोनी आज पूरे भारत को पेप्सी का जहर बेच रहा है ! और एक बात ध्यान दे जब भी क्रिकेट मैच की दौरान water break होती है तब इनमे से कोई खिलाड़ी pepsi coke क्यूँ नहीं पीता ? क्यूँ कि ये सब जानते है ये जहर है ! इन्हे बस ये देश वासियो को पिलाना है !
ज्यादातर लोगों से पूछिए कि "आप ये सब क्यों पीते हैं ?" तो कहते हैं कि "ये बहुत अच्छी क्वालिटी का है" | अब पूछिये कि "अच्छी क्वालिटी का क्यों है" तो कहते हैं कि "अमेरिका का है"| और ये उत्तर पढ़े-लिखे लोगों के होते हैं |
![]() |
| जानिए, आप क्या पी रहे हैं! |
पेप्सी-कोक के बारे में आपको एक और जानकारी देता हूँ - स्वामी रामदेव जी इसे टॉयलेट क्लीनर कहते हैं, आपने सुना होगा (ठंडा मतलब टाइलेट कालीनर ) तो वो कोई इसको मजाक में नहीं कहते या उपहास में नहीं कहते हैं,देश के पढ़े लिखे मूर्ख लोग समझते है कि ये बात किसी ने ऐसे ही बना दी है!
| घर-बाहर फ़ल-सब्जियों का ताज़ा रस पीजिए |
और हम लोगो का हाल ये है ! घर मे मेहमान के आते ही ये जहर उसके आगे करते हैं! दोस्तो, हमारी महान भारतीय संस्कृति मे कहा गया है ! अतिथि देवो भव ! मेहमान भगवान का रूप है ! और आप उसे टॉइलेट क्लीनर पिला रहे हैं!
![]() |
| ताज़ा नींबू-मसाले वाले गन्ने के रस का ज़ादू! |
राजीव भाई कहते हैं 1997 मे जब उन्होने पेप्सी और कोक के खिलाफ अभियान शुरू किया था तो वो अकेले थे लेकिन आज भारत में 70 संस्थाएं हैं जो पेप्सी-कोक के खिलाफ अभियान चला रहीं हैं, हम खुश हैं कि इनके बिक्री में कमी आयी है | और इनकी बिक्री 60% कम हुई ! 1997 मे ये दोनों कंपनिया कुल 700 करोड़ बोतल बेचती थी ! और आज भी बहुत ज्यादा है ! लेकिन अगर हम सब संकल्प ये जहर न खुद पीएंगे न किसी को पिलाएंगे तो ये 50 करोड़ बोतले बिकनी भी बंद हो जायगी!और ये दोनों कंपनिया अपने देश अमेरिका भाग जाएंगी !
यहाँ जरूर जरूर click करे !
http://www.youtube.com/
• खिलाड़ी, फ़िल्मी सितारे और कुछ अन्य मशहूर लोग हमारे आदर्श नहीं हो सकते। ये लोग हमारे मित्र नहीं हैं। इनका काम है अपरोक्ष रूप से हमारा शोषण करने में हमारे स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही अनेक कम्पनियों को सहयोग देना और खुद करोड़ों कमाना। हम कब यह सब समझेंगे। शान या स्टेटस की खातिर ये खतरनाक शीतल पेय पीना बन्द कीजिए, मुफ़्त का माल हो तब भी। दावतों में मेहमानों को ऐसे पेय पिलाकर उनके साथ धोखा आखिर क्यों किया जाता है! तमाम नकली शीतल पेयों को मंगाना, पीना-पिलाना बन्द कीजिए औरों को भी प्रेरित कीजिए!
• इसके अलावा इन कम्पनियों ने पैट बोतलों के रूप में हर गांव-शहर को अपनी चपेट में ले लिया है। जमीन की तहों में पिचकी बोतलें शामिल हो गयी हैं। अक्सर लापरवाही से फ़ैंकी गयी ये बोतलें दुर्घटना का कारण भी बन जाती हैं।
• सुराही, घड़ा और अन्य बरतनों की जगह ये पैट बोतलें जमकर उपयोग की जा रही हैं। हमारे ये कृत्य निश्चय ही पर्यावरण के विरुद्ध हैं।
लेबल:
actor,
bharat,
coca cola,
cold drink,
cricketer,
juice,
pepsi,
summer,
toilet cleaner
गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013
वैलेंटाइन
वैलेंटाइन डे कथा
अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है। जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है। यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है। अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है। हमारे यहाँ के लड़के-लड़िकयां बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं।
यूरोप (और अमेरिका) का समाज रखैलों (Kept) में विश्वास रखता है, पत्नियों में नहीं। यूरोप और अमेरिका में आपको शायद ही ऐसा कोई पुरुष या मिहला मिले जिसकी एक शादी हुई हो, जिनका एक पुरुष से या एक स्त्री से सम्बन्ध रहा हो और ये एक दो नहीं हजारों साल की परम्परा है उनके यहाँ। आपने सुना होगा Live in Relationship, ये शब्द आज कल हमारे देश में भी नव-अभिजात्य वर्ग में चल रहे हैं, इसका मतलब होता है कि ‘बिना शादी के पती-पत्नी की तरह से रहना’| तो उनके यहाँ, मतलब यूरोप और अमेरिका में ये परम्परा आज भी चलती है, खुद प्लेटो (एक यूरोपीय दार्शनिक) का एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा। प्लेटो ने लिखा है कि ‘मेरा 20-22 स्त्रीयों से सम्बन्ध रहा है।’ अरस्तु भी यही कहता है और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि ‘एक स्त्री के साथ रहना, ये तो कभी संभव ही नहीं हो सकता’- It's Highly Impossible" तो वहां एक पत्नी जैसा कुछ होता नहीं। और इन सभी महान दार्शनिकों का तो कहना है कि ‘स्त्री में तो आत्मा ही नहीं होती’, ‘स्त्री तो मेज और कुर्सी के समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तो पुराना हटा के नया ले आये।’
बीच-बीच में यूरोप में कुछ-कुछ ऐसे लोग भी निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की ऐसी व्यवस्थाओं पर कड़ी टिप्पणी की। उन कुछ लोगों में से एक ऐसे ही यूरोपियन व्यक्ति थे जो आज से लगभग 1500 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था - वैलेंटाइन। और ये कहानी है 478 AD (after death) की, यानी ईसा की मृत्यु के बाद।
उस वैलेंटाइन नाम के महापुरुष का कहना था कि ‘हम लोग (यूरोप के लोग) जो शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं कुत्तों की तरह से, जानवरों की तरह से, ये अच्छा नहीं है, इससे सेक्स-जनित रोग (veneral disease) होते हैं, इनको सुधारो, एक पति-एक पत्नी के साथ रहो, विवाह कर के रहो, शारीरिक संबंधो को उसके बाद ही शुरू करो।’ ऐसी-ऐसी बातें वो करते थे और वो वैलेंटाइन महाशय उन सभी लोगों को ये सब सिखाते थे, बताते थे जो उनके पास आते थे। रोज उनका भाषण यही चलता था रोम में घूम-घूम कर।
संयोग से वैलेंटाइन चर्च के पादरी हो गए तो चर्च में आने वाले हर व्यक्ति को यही बताते थे। लोग उनसे पूछते थे कि ये वायरस आप में कहाँ से घुस गया। ये तो हमारे यूरोप में कहीं नहीं है, तो वो कहते थे कि ‘आजकल मैं भारतीय सभ्यता और दर्शन का अध्ययन कर रहा हूँ, और मुझे लगता है कि वह परफेक्ट है और इसिलए मैं चाहता हूँ कि आप लोग इसे मानो।’ कुछ लोग उनकी बात को मानते थे। जो लोग उनकी बात को मानते थे उनकी शादियाँ वो चर्च में कराते थे। एक-दो नहीं उन्होंने सैकड़ों शादियाँ करवाई थीं
जिस समय वैलेंटाइन हुए, उस समय रोम का राजा था क्लॉडियस। क्लौड़ीयस ने कहा कि ‘ये जो आदमी है- वैलेंटाइन, ये हमारे यूरोप की परंपरा को बिगाड़ रहा है। हम बिना शादी के रहने वाले लोग हैं, मौज-मजे में डूबे रहने वाले लोग हैं, और ये शादियाँ करवाता फ़िर रहा है। ये तो अपसंस्कृति फैला रहा है। हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहा ह॥ तो क्लॉडियस ने आदेश दिया कि ‘जाओ वैलेंटाइन को पकड़ कर लाओ। उसके सैनिक वैलेंटाइन को पकड़ कर ले आए। क्लॉडियस ने वैलेंटाइन से कहा कि ‘ये तुम क्या गलत काम कर रहे हो ? तुम अधर्म फैला रहे हो, अपसंस्कृति ला रहे हो।’ तो वैलेंटाइन ने कहा कि ‘मुझे लगता है कि ये ठीक है, क्लॉडियस ने उसकी एक बात न सुनी और उसने वैलेंटाइन को फाँसी की सजा दे दी। आरोप क्या था कि वो बच्चों की शादियाँ कराते थे, मतलब शादी कराना जुर्म था। क्लॉडियस ने उन सभी बच्चों को बुलाया जिनकी शादी वैलेंटाइन ने करवाई थी और उन सभी के सामने वैलेंटाइन को 14 फ़रवरी 498 ईःवी को फाँसी दे दी गयी।
पता नहीं आप में से कितने लोगों को मालूम है कि पूरे यूरोप में 1950 ईःवी तक खुले मैदान में, सावर्जानिक तौर पर फाँसी देने की परंपरा थी। तो जिन बच्चों ने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थी वो बहुत दुखी हुए और उन सब ने उस वैलेंटाइन की दुखद याद में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया। उस दिन से यूरोप में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | मतलब यह हुआ कि वैलेंटाइन, जो कि यूरोप में शादियाँ करवाते फ़िरते थे, चूंकि राजा ने उनको फाँसी की सजा दे दी तो उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है। यह था वैलेंटाइन डे का इतिहास और इसके पीछे का आधार।
अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है। जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है। यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है। अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है। हमारे यहाँ के लड़के-लड़िकयां बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं। जो कार्ड होता है उसमे लिखा होता है- Would You Be My Valentine" जिसका मतलब होता है- क्या आप मुझसे शादी करेंगे। मतलब तो किसी को मालूम होता नहीं है, वो समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं उन्हें ये कार्ड देना चाहिए तो वो इसी कार्ड को अपने मम्मी-पापा को भी दे देते हैं, दादा-दादी को भी दे देते हैं और एक दो नहीं दस-बीस लोगों को यही कार्ड वो दे देते हैं। और इस धंधे में बड़ी-बड़ी कंपिनयाँ लग गयी हैं जिनको कार्ड बेचना है, जिनको गिफ्ट बेचना है, जिनको चाकलेट बेचनी हैं और टेलीविजन चैनल वालों ने इसका धुंआधार प्रचार कर दिया। यह सब लिखने के पीछे का उद्देँशय यही है कि नक़ल आप करें तो उसमे अकल भी लगा लिया करें। उनके यहाँ साधारणतया शादियाँ नहीं होती है और जो शादी करते हैं वो वैलेंटाइन डे मनाते हैं लेकिन हम भारत में क्यों मनाए जा रहे हैं?
जय हिंद!
राजीव दीक्षित
सौजन्य: स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ
अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है। जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है। यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है। अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है। हमारे यहाँ के लड़के-लड़िकयां बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं।
यूरोप (और अमेरिका) का समाज रखैलों (Kept) में विश्वास रखता है, पत्नियों में नहीं। यूरोप और अमेरिका में आपको शायद ही ऐसा कोई पुरुष या मिहला मिले जिसकी एक शादी हुई हो, जिनका एक पुरुष से या एक स्त्री से सम्बन्ध रहा हो और ये एक दो नहीं हजारों साल की परम्परा है उनके यहाँ। आपने सुना होगा Live in Relationship, ये शब्द आज कल हमारे देश में भी नव-अभिजात्य वर्ग में चल रहे हैं, इसका मतलब होता है कि ‘बिना शादी के पती-पत्नी की तरह से रहना’| तो उनके यहाँ, मतलब यूरोप और अमेरिका में ये परम्परा आज भी चलती है, खुद प्लेटो (एक यूरोपीय दार्शनिक) का एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा। प्लेटो ने लिखा है कि ‘मेरा 20-22 स्त्रीयों से सम्बन्ध रहा है।’ अरस्तु भी यही कहता है और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि ‘एक स्त्री के साथ रहना, ये तो कभी संभव ही नहीं हो सकता’- It's Highly Impossible" तो वहां एक पत्नी जैसा कुछ होता नहीं। और इन सभी महान दार्शनिकों का तो कहना है कि ‘स्त्री में तो आत्मा ही नहीं होती’, ‘स्त्री तो मेज और कुर्सी के समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तो पुराना हटा के नया ले आये।’
बीच-बीच में यूरोप में कुछ-कुछ ऐसे लोग भी निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की ऐसी व्यवस्थाओं पर कड़ी टिप्पणी की। उन कुछ लोगों में से एक ऐसे ही यूरोपियन व्यक्ति थे जो आज से लगभग 1500 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था - वैलेंटाइन। और ये कहानी है 478 AD (after death) की, यानी ईसा की मृत्यु के बाद।
उस वैलेंटाइन नाम के महापुरुष का कहना था कि ‘हम लोग (यूरोप के लोग) जो शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं कुत्तों की तरह से, जानवरों की तरह से, ये अच्छा नहीं है, इससे सेक्स-जनित रोग (veneral disease) होते हैं, इनको सुधारो, एक पति-एक पत्नी के साथ रहो, विवाह कर के रहो, शारीरिक संबंधो को उसके बाद ही शुरू करो।’ ऐसी-ऐसी बातें वो करते थे और वो वैलेंटाइन महाशय उन सभी लोगों को ये सब सिखाते थे, बताते थे जो उनके पास आते थे। रोज उनका भाषण यही चलता था रोम में घूम-घूम कर।
संयोग से वैलेंटाइन चर्च के पादरी हो गए तो चर्च में आने वाले हर व्यक्ति को यही बताते थे। लोग उनसे पूछते थे कि ये वायरस आप में कहाँ से घुस गया। ये तो हमारे यूरोप में कहीं नहीं है, तो वो कहते थे कि ‘आजकल मैं भारतीय सभ्यता और दर्शन का अध्ययन कर रहा हूँ, और मुझे लगता है कि वह परफेक्ट है और इसिलए मैं चाहता हूँ कि आप लोग इसे मानो।’ कुछ लोग उनकी बात को मानते थे। जो लोग उनकी बात को मानते थे उनकी शादियाँ वो चर्च में कराते थे। एक-दो नहीं उन्होंने सैकड़ों शादियाँ करवाई थीं
पता नहीं आप में से कितने लोगों को मालूम है कि पूरे यूरोप में 1950 ईःवी तक खुले मैदान में, सावर्जानिक तौर पर फाँसी देने की परंपरा थी। तो जिन बच्चों ने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थी वो बहुत दुखी हुए और उन सब ने उस वैलेंटाइन की दुखद याद में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया। उस दिन से यूरोप में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | मतलब यह हुआ कि वैलेंटाइन, जो कि यूरोप में शादियाँ करवाते फ़िरते थे, चूंकि राजा ने उनको फाँसी की सजा दे दी तो उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है। यह था वैलेंटाइन डे का इतिहास और इसके पीछे का आधार।
अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है। जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है। यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है। अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है। हमारे यहाँ के लड़के-लड़िकयां बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं। जो कार्ड होता है उसमे लिखा होता है- Would You Be My Valentine" जिसका मतलब होता है- क्या आप मुझसे शादी करेंगे। मतलब तो किसी को मालूम होता नहीं है, वो समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं उन्हें ये कार्ड देना चाहिए तो वो इसी कार्ड को अपने मम्मी-पापा को भी दे देते हैं, दादा-दादी को भी दे देते हैं और एक दो नहीं दस-बीस लोगों को यही कार्ड वो दे देते हैं। और इस धंधे में बड़ी-बड़ी कंपिनयाँ लग गयी हैं जिनको कार्ड बेचना है, जिनको गिफ्ट बेचना है, जिनको चाकलेट बेचनी हैं और टेलीविजन चैनल वालों ने इसका धुंआधार प्रचार कर दिया। यह सब लिखने के पीछे का उद्देँशय यही है कि नक़ल आप करें तो उसमे अकल भी लगा लिया करें। उनके यहाँ साधारणतया शादियाँ नहीं होती है और जो शादी करते हैं वो वैलेंटाइन डे मनाते हैं लेकिन हम भारत में क्यों मनाए जा रहे हैं?
जय हिंद!
राजीव दीक्षित
लेबल:
live in,
relation,
valentine,
valentine day
सोमवार, 4 फ़रवरी 2013
फ़िर निर्मल
फ़िर वही निर्मल बाबा
आज समाचार खोज अभियान के अन्तर्गत ‘न्यूज़ 24' चैनल लग गया। वहां ‘विज्ञापन दाता’ के रूप में निर्मल बाबा (?) एक अन्तराल के बाद दिखा। अब आप क्या कहेंगे! कोई फ़र्क पड़ा इतनी किट-किट का...
धन की खातिर यह मीडिया कुछ भी करने को तैयार रहेगा...दुष्ट लोग भ्रम फ़ैलाकर अपना उल्लू सीधा करते रहेंगे।
लेबल:
bharat,
fraud,
nirmal,
nirmal baba,
religion
सोमवार, 28 जनवरी 2013
बैण्ड
अपना ‘बैण्ड’ बजाएं
अंग्रेजों की सेना जब भारत में आयी तो उनके ब्रास बैण्ड भी साथ में आये। उनको भारत के राजाओं पर हमला करना होता था तब उनका ब्रास बैण्ड बजता रहता था। बाद में जब अंग्रेज गये तो वह ब्रास बैण्ड को यहीं छोड़ गये और हमने उसको बजाना शुरू कर दिया शादी, बारातों और अनेक शुभ अवसरों पर। वैदिक और दूसरी पद्धतियों में होने वाले विवाह में जो पश्चिम की नक़ल है वह है ब्रास बैण्ड बजाकर बारात लेकर जाना।
यह पूरी की पूरी अंग्रेजों की नक़ल है। यूरोप में यह परंपरा है, खासकर इंग्लैण्ड, आयरलैण्ड, स्कॉट्लैण्ड में। यह ब्रास और बैण्ड तब बजाया जाता है जब दुश्मन पर हमला करने के लिए जाया जाता है और सेना के आगे-आगे चल कर जाते हैं ताकि सेना में जोश भरे, उत्साह भरे और दुश्मन पर जाके टूट पड़े, हमला करे। यहाँ मूर्ख भारतवासी शादियों में बारात में वो ब्रास बैण्ड लेकर जाते हैं। पता नहीं किस दुश्मन पर हमला करने जा रहे हैं!
भारत में हर शुभ अवसर पर या काम में शहनाई बजती है तो शहनाई बजाइए, बांसुरी बजाइए पर बेसुरा ब्रास बैण्ड बजाना बन्द करिए।
दिये गए लिंक पर जाकर वीडियो देखे : http://www.youtube.com/watch?v=MWL8_wGCbMQ
यह पूरी की पूरी अंग्रेजों की नक़ल है। यूरोप में यह परंपरा है, खासकर इंग्लैण्ड, आयरलैण्ड, स्कॉट्लैण्ड में। यह ब्रास और बैण्ड तब बजाया जाता है जब दुश्मन पर हमला करने के लिए जाया जाता है और सेना के आगे-आगे चल कर जाते हैं ताकि सेना में जोश भरे, उत्साह भरे और दुश्मन पर जाके टूट पड़े, हमला करे। यहाँ मूर्ख भारतवासी शादियों में बारात में वो ब्रास बैण्ड लेकर जाते हैं। पता नहीं किस दुश्मन पर हमला करने जा रहे हैं!
भारत में हर शुभ अवसर पर या काम में शहनाई बजती है तो शहनाई बजाइए, बांसुरी बजाइए पर बेसुरा ब्रास बैण्ड बजाना बन्द करिए।
दिये गए लिंक पर जाकर वीडियो देखे : http://www.youtube.com/watch?v=MWL8_wGCbMQ
लेबल:
angrejee band,
bad,
bharat,
brass band,
hindu,
marriage
सदस्यता लें
संदेश (Atom)








