शिकायत बोल

शिकायत बोल
ऐसा कौन होगा जिसे किसी से कभी कोई शिकायत न हो। शिकायत या शिकायतें होना सामान्य और स्वाभाविक बात है जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। हम कहीं जाएं या कोई काम करें अपनों से या गैरों से कोई न कोई शिकायत हो ही जाती है-छोटी या बड़ी, सहनीय या असहनीय। अपनों से, गैरों से या फ़िर खरीदे गये उत्पादों, कम्पनियों, विभिन्न सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की सेवाओं, लोगों के व्यवहार-आदतों, सरकार-प्रशासन से कोई शिकायत हो तो उसे/उन्हें इस मंच शिकायत बोल पर रखिए। शिकायत अवश्य कीजिए, चुप मत बैठिए। आपको किसी भी प्रकार की किसी से कोई शिकायत हो तोर उसे आप औरों के सामने शिकायत बोल में रखिए। इसका कम या अधिक, असर अवश्य पड़ता है। लोगों को जागरूक और सावधान होने में सहायता मिलती है। विभिन्न मामलों में सुधार की आशा भी रहती है। अपनी बात संक्षेप में संयत और सरल बोलचाल की भाषा में हिन्दी यूनीकोड, हिन्दी (कृतिदेव फ़ोन्ट) या रोमन में लिखकर भेजिए। आवश्यक हो तो सम्बधित फ़ोटो, चित्र या दस्तावेज जेपीजी फ़ार्मेट में साथ ही भेजिए।
इस शिकायत बोल मंच के बारे में अपने इष्ट-मित्रों को भी बताएं।
ई-मेल: शिकायत बोल
shikayatbol@gmail.com
फ़ेसबुक पर

बुधवार, 14 दिसंबर 2011

शर्मनाक सानिया

यह है भारत में जन्मी और पाकिस्तान में ब्याही टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा। 
आप खुद देखिए कि यह क्या कर ही है...
लिन्क: सानिया मिर्ज़ा










पेड़ पुताई


मेरे शहर जयपुर के पेड़ 
आगामी अप्रवासी भारतीय सम्मेलन के मद्देनजर शहर की सड़कों को खूबसूरत दिखाने के नाम पर जयपुर में जवाहर लाल नेहरू मार्ग पर बजाज नगर एक्सचेंज के पास सड़क किनारे लगे पेड़ों को किस बेदर्दी के साथ आयल पेंट से पोत डाला गया है...बिना ये सोचे समझे कि वृक्षों में भी जीवन होता है . ज़िंदा आदमी का गला घौंटने जैसा है ये कृत्य ...... !
नगेन्द्र पारीक, जयपुर, फ़ेसबुक पर

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

प्राणवायु

प्रकृति से प्रेम 
एक आदमी एक दिन में इतना ऑक्सीजन लेता है जितने में 3 ऑक्सीजन के सिलेंडर भरे जा सकते हैं| एक ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत होती है 700 रुपये। इस तरह हम देखते हैं कि एक आदमी एक दिन में 2100 रुपये (700X3) की ऑक्सीजन लेता है और 1 साल में 766500 की रुपये और अपने पूरे जीवन (अगर आदमी कि उम्र 65 साल हो) में लगभग 5 करोड़ रुपये की ऑक्सीजन लेता है जो कि पेड़-पौधों द्वारा हमे मुफ़्त में मिलती है और हम उन्ही पेड़ पौधों को समाप्त कर रहे हैं!
आइए, हम पेड़-पौधों की रक्षा करने की शपथ लें, अपने आसपास हरियाली बढ़ाएं। घर में गमलों में ही सही, कुछ पौधे अवश्य लगाएं। जमीन है तो उसमें पेड़-पौधे लगाएं। बहु उपयोगी और वायु शुद्ध करने वाली तुलसी तो हमारे घर में होनी ही चाहिए।

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

नाइंसाफ़ी


कानून से ऊपर बाबा राम रहीम! दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस की नाक के नीचे राम रहीम की ६ महंगी गाड़ियों पर एक ही रजिस्ट्रेशन नम्बर DL5CB 3672 (सौजन्य: न्यूज़ २४)


गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011

बिजली गॉन, मीटर ऑन

बीएसईएस की कारगुजारी 
बिजली का कनेक्शन काटते समय मीटर की रीडिंग ४४७ यूनिट थी। २ दिन बाद अचानक सूबे सिंह की नज़र मीटर पर पड़ी तो उनके होश उड़ गये। बिना बिजली कनेक्शन के मीटर दौड़ रहा था और उसमें रीडिंग १२५७ थी। उन्होंने अपने इष्ट-मित्र-पड़ोसियों को बुलाकर यह करामात दिखाई। सभी यह देख आश्चर्यचकित और आक्रोषित थे। 
निजी बिजली कम्पनी बीएसईएस (मालिक अम्बानी) के ऊपर दिल्ली की मुख्य मन्त्री श्रीमती शीला दीक्षित की असीम कृपा है। खुलेआम इस कम्पनी का वे पक्ष लेती हैं। तेज दौड़ते बिजली के मीटरों से लोग लम्बे समय से परेशान हैं। मनमाने बिलों से परेशान हैं। पर राहत की बजाय लोगों के हाथ सिर्फ़ परेशानियां ही आती हैं।





पिछले दिनों बिजली का बिल समय पर जमा न कर पाने के कारण दिल्ली के नजफ़गढ़ क्षेत्र के गांव खड़खड़ी रोंद निवासी सूबे सिंह के घर का कनेक्शन काट दिया गया। बिजली का कनेक्शन काटते समय मीटर की रीडिंग ४४७ यूनिट थी। २ दिन बाद अचानक सूबे सिंह की नज़र मीटर पर पड़ी तो उनके होश उड़ गये। बिना बिजली कनेक्शन के मीटर दौड़ रहा था और उसमें रीडिंग १२५७ थी। उन्होंने अपने इष्ट-मित्र-पड़ोसियों को बुलाकर यह करामात दिखाई। सभी यह देख आश्चर्यचकित और आक्रोषित थे।
वे तत्काल इस मामले की शिकायत करने ३ बार उजवा और नजफ़गढ़ दफ़्तर गये। किसी बिजली अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनी। मीटर की जांच के लिए पहले ५० रुपये शुल्क जमा कराकर शिकायत करने को  को कहा गया। सूबे सिंह ने अनेक परेशानियां झेलते हुए बिजली दफ़्तर के अधिकारियों के निर्देशों का पालन किया। फ़िर उन्हें बिजली के बिल की बकाया राशि २३०० रुपये भी जमा कराने को कहा गया। वह भी उन्होंने जमा करा दी। इसके बाद बिजली अधिकारी उनके घर गये और दिया गया विवरण सही पाकर तत्काल मीटर बदलने का पर्चा काट दिया। सूबे सिंह के घर का दो दिन जमकर चला बिजली का फ़िलहाल बन्द है। पर बिजली का दोषयुक्त यह मीटर ये पंक्तियां लिखे जाने तक यानी आज २० अक्टूबर २०११ तक भी नहीं बदला गया है।
यही है जनसेवा करने वाली सरकार के तमाम कामों का एक नमूना।
• सुरेश त्रेहान
नाहरगढ़ साप्ताहिक, नयी दिल्ली



मंगलवार, 16 अगस्त 2011

गुरुवार, 30 जून 2011

तेल भारत

तेल पर सरकार का जनता को मूर्ख बनाने का असली खेल
भारत में जो सरकारी तेल कम्पनिया हैं उनमें बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार है। भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम तथा ओएनजीसी में पूरे विश्व में प्रति लीटर मार्जिन, प्रति कर्मचारी खर्च (सेलेरी) का अनुपात बहुत जयादा है। हर तेल कंपनी का 58 % केवल कर्मचारियों पर ही खर्च होता है।
ओएनजीसी के पास 8 जेट जहाज तथा 26 हेलिकॉप्टर है जिनका उपयोग मंत्री और नेता ही करते है। एक आर टी आई से पता चला की जब आर. पी. एन. सिंह पेट्रोलियम राज्य मंत्री थे तो उन्होंने सिर्फ 1 साल में ही 37 बार ओएनजीसी के प्लेन से दिल्ली से अपने क्षेत्र पडरौना की यात्रा की थी।
हर बहस में कांग्रेस के नेता तेल की कीमतों में बढ़ौतरी को जायज ठहराते हैं और सरकार को हो रहे नुकसान का रोना रोते हैं। सरकार और कांग्रेस कब तक जनता को मूर्ख समझती रहेंगी? आज कच्चे तेल की कीमत है 90 डॉलर प्रति बैरेल यानि 25.50 रुपये प्रति लीटर। एक लीटर कच्चे तेल को रिफाइन करने का खर्च है 20 पैसे। यानी सरकार को एक लीटर पेट्रोल की लागत आयी रुपये- 25.70। अब असली खेल यहाँ से शुरू होता है।
केंद्र सरकार
• 13 % उत्पाद कर (एक्साइज)- 30.06 + 13% = 34, पोर्ट टैक्स (तेल के टेंकर से वसूला जाता है)
• 1500 डॉलर छोटे टेंकर से और 25000 डॉलर बड़े टेंकर से एक लीटर पर करीब 3% होगा- 34+3% = 35.02
• 8 % रिफाइनरी मार्जिन टैक्स- 35.02 +8% = 37.82
राज्य सरकार
• 8% से 12.5 % तक वैट- 37.82+ 12.5% = 42.54
रुपये
• 4 % से 8 % तक एजूकेशनल सेस- 42.54+8% = 46
यानी सरकार एक लीटर पेट्रोल से 20 रुपये 25 पैसे पहले ही कमा लेती है। आज पेट्रोल लगभग 68 रुपये तक में बिक रहा है। असल में भारत में जो सरकारी तेल कम्पनिया हैं उनमे बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार है। भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल , हिंदुस्तान पेट्रोलियम तथा ओएनजीसी में पूरे विश्व में प्रति लीटर मार्जिन, प्रति कर्मचारी खर्च (सेलेरी) का अनुपात बहुत जयादा है। हर तेल कंपनी का 58 % केवल कर्मचारियों पर ही खर्च होता है।
ओएनजीसी के पास 8 जेट जहाज तथा 26 हेलिकॉप्टर है जिनका उपयोग मंत्री और नेता ही करते है। एक आर टी आई से पता चला की जब आर. पी. एन. सिंह पेट्रोलियम राज्य मंत्री थे तो उन्होंने सिर्फ 1 साल में ही 37 बार ओएनजीसी के प्लेन से दिल्ली से अपने क्षेत्र पडरौना की यात्रा की थी।
आखिर कांग्रेस तेल के पीछे का असली खेल जनता को क्यों नहीं बताती। तेल की कीमतों पर कांग्रेस और सरकार कब तक जनता को मूर्ख बनाते रहेंगे?
• अनिल गुप्ता