शिकायत बोल

शिकायत बोल
ऐसा कौन होगा जिसे किसी से कभी कोई शिकायत न हो। शिकायत या शिकायतें होना सामान्य और स्वाभाविक बात है जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। हम कहीं जाएं या कोई काम करें अपनों से या गैरों से कोई न कोई शिकायत हो ही जाती है-छोटी या बड़ी, सहनीय या असहनीय। अपनों से, गैरों से या फ़िर खरीदे गये उत्पादों, कम्पनियों, विभिन्न सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की सेवाओं, लोगों के व्यवहार-आदतों, सरकार-प्रशासन से कोई शिकायत हो तो उसे/उन्हें इस मंच शिकायत बोल पर रखिए। शिकायत अवश्य कीजिए, चुप मत बैठिए। आपको किसी भी प्रकार की किसी से कोई शिकायत हो तोर उसे आप औरों के सामने शिकायत बोल में रखिए। इसका कम या अधिक, असर अवश्य पड़ता है। लोगों को जागरूक और सावधान होने में सहायता मिलती है। विभिन्न मामलों में सुधार की आशा भी रहती है। अपनी बात संक्षेप में संयत और सरल बोलचाल की भाषा में हिन्दी यूनीकोड, हिन्दी (कृतिदेव फ़ोन्ट) या रोमन में लिखकर भेजिए। आवश्यक हो तो सम्बधित फ़ोटो, चित्र या दस्तावेज जेपीजी फ़ार्मेट में साथ ही भेजिए।
इस शिकायत बोल मंच के बारे में अपने इष्ट-मित्रों को भी बताएं।
ई-मेल: शिकायत बोल
shikayatbol@gmail.com
फ़ेसबुक पर

बुधवार, 24 अप्रैल 2013

चालान

चालान-चालान


एक RTI से मिली जानकारी के अनुसार यदि वाहन की जाँच के समय चालक के पास मूल दस्तावेज (लायसेंस, बीमा, फिटनेस इत्यादि) नहीं हैं, तो उसे वह दस्तावेज पेश करने के लिए १५ दिनों का समय मिलता है. यहाँ तक कि वह सारे दस्तावेजों की फोटोकापी, किसी राजपत्रित अधिकारी से सत्यापित करवाकर यातायात विभाग को पंजीकृत डाक से भी भेज सकता है... 

-----------------------------

• यदि आप भूलवश अपना कोई दस्तावेज साथ नहीं लाए हैं और वाहन चैकिंग के दौरान पकड़े गए हैं तो कैश चालान भरने के बजाए आप अपना चालान कटवा लें। क्योंकि अगले 15 दिन तक आप असली दस्तावेज दिखाकर और 100 रुपये की फीस जमाकर चालान को निरस्त करवा सकते हैं। ध्यान रखें, यदि आपने कैश चालान कटवा लिया है तो वह निरस्त नहीं हो सकता। यह सही और जरूरी जानकारी अपने मित्रों से साझा कर आप उन्हें वाहन जांच

नोटः अलग-अलग राज्यों में चालान की राशि और चालान निरस्त करने की फीस अलग-अलग हो सकती है, इसलिए अपने राज्य के हिसाब से सही जानकारी हासिल करें। चालान कटने के 15 दिन के अंदर असली दस्तावेज दिखाकर निरस्त करवाया जा सकता है।
(यह जानकारी उत्तर प्रदेश के लिए है।) महत्वपूर्ण जरुरी सूचना जनहित में शेयर करें तथा भ्रष्टाचार को रोकने में मदद करें।
यह जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त की गयी है।
लिन्क: http://www.facebook.com/InfoLinkZone 

मंगलवार, 23 अप्रैल 2013

धोखाकोला

पेप्सी और कोका कोला में है क्या
• राजीव दीक्षित
http://www.facebook.com/BE.INDIAN.BUY.NDIAN.RAJIVDIXIT 
•  कार्बन डाईऑक्साइड - जो कि बहुत जहरीली गैस है और जिसको कभी भी शरीर के अन्दर नहीं ले जाना चाहिए और इसीलिए इन कोल्ड ड्रिंक्स को "कार्बोनेटेड वाटर" कहा जाता है | और इन्ही जहरों से भरे पेय का प्रचार भारत के क्रिकेटर और अभिनेता/अभिनेत्री करते हैं पैसे के लालच में, उन्हें देश और देशवाशियों से प्यार होता तो ऐसा कभी नहीं करते |
• तथ्य ये कि टॉयलेट क्लीनर harpic और पेप्सी-कोक की Ph value एक ही है | मैं आपको सरल भाषा में समझाने का प्रयास करता हूँ | Ph एक इकाई होती है जो acid की मात्रा बताने का काम करती है !और उसे मापने के लिए Ph मीटर होता है | शुद्ध पानी का Ph सामान्यतः 7 होता है ! और (7 Ph) को सारी दुनिया में सामान्य माना जाता है, और जब पानी में आप हाईड्रोक्लोरिक एसिड या सल्फ्यूरिक एसिड या फिर नाइट्रिक एसिड या कोई भी एसिड मिलायेंगे तो Ph का वैल्यू 6 हो जायेगा, और ज्यादा एसिड मिलायेंगे तो ये मात्रा 5 हो जाएगी, और ज्यादा मिलायेंगे तो ये मात्रा 4 हो जाएगी, ऐसे ही करते-करते जितना acid आप मिलाते जाएंगे ये मात्रा कम होती जाती है | जब पेप्सी-कोक के एसिड का जाँच किया गया तो पता चला कि वो 2.4 है और जो टॉयलेट क्लीनर होता है उसका Ph और पेप्सी-कोक का Ph एक ही है, 2.4 का मतलब इतना ख़राब जहर कि आप टॉयलेट में डालेंगे तो ये झकाझक सफ़ेद हो जायेगा |

भारत के कई वैज्ञानिकों ने पेप्सी और कोका कोला पर रिसर्च करके बताया कि इसमें मिलाते क्या हैं| पेप्सी और कोका कोला वालों से पूछिए तो वो बताते नहीं हैं, कहते हैं कि ये फॉर्मूला टॉप सेक्रेट है, ये बताया नहीं जा सकता| लेकिन आज के युग में कोई भी सेक्रेट को सेक्रेट बना के नहीं रखा जा सकता। वैज्ञानिकों ने  अध्ययन कर के बइसमे कुल 21 तरह के जहरीले कैमिकल मिलाये जाते हैं ! कुछ नाम बताता हूँ !इसमें पहला जहर जो मिला होता है- सोडियम मोनो ग्लूटामेट, और वैज्ञानिक कहते हैं कि ये कैंसर करने वाला रसायन है, फिर दूसरा जहर है- पोटैसियम सोरबेट - ये भी कैंसर करने वाला है, तीसरा जहर है - ब्रोमिनेटेड वेजिटेबल ऑइल (BVO)- ये भी कैंसर करता है | चौथा जहर है- मिथाइल बेन्जीन - ये किडनी को ख़राब करता है, पाँचवा जहर है - सोडियम बेन्जोईट- ये मूत्र नली का, लीवर का कैंसर करता है, फिर इसमें सबसे ख़राब जहर है- एंडोसल्फान- ये कीड़े मारने के लिए खेतों में डाला जाता है और ऊपर से होता है ऐसे करते करते इस में कुल 21 तरह के जहर मिलाये जाते हैं !
जानिए, इसमें मिलाते क्या हैं। ये 21 तरह के जहर तो एक तरफ है और हमारे देश के पढ़े लिखे लोगो के दिमाग का हाल देखिये -बचपन से उन्हे किताबों मे पढ़ाया जाता है ! की मनुष्य को प्राण वायु आक्सीजन अंदर लेनी चाहिए और कार्बन डाईऑक्साइड बाहर निकलनी चाहिए ये जानने के बावजूद भी गट गट कर उसे पे रहे हैं! और पीते ही एक दम नाक मे जलन होती और वो सीधा दिमाग तक जाती है! और फिर दूसरा घूट भरते हैं गट-गट-गट !
और हमारा दिमाग इतना गुलाम हो गया है! आज हम किसी बिना coke pepsi के जहर के किसी भी शादी विवाह पार्टी के बारे मे सोचते भी नही! कार्बन डाईऑक्साइड- जो कि बहुत जहरीली गैस है और जिसको कभी भी शरीर के अन्दर नहीं ले जाना चाहिए और इसीलिए इन कोल्ड ड्रिंक्स को "कार्बोनेटेड वाटर" कहा जाता है | और इन्ही जहरों से भरे पेय का प्रचार भारत के क्रिकेटर और अभिनेता/अभिनेत्री करते हैं पैसे के लालच में, उन्हें देश और देशवाशियों से प्यार होता तो ऐसा कभी नहीं करते |
पहले आमिर खान ये जहर बिकवाता था अब उसका भांजा बिकवाता है! अमिताभ बच्चनशारूखान ,रितिक रोशन...लगभग सबने इस कंपनी का जहर भारत मे बिकवाया है! क्यूंकि इनके लिए देश से बड़ा पैसा है !
पूरी क्रिकेट टीम इस दोनों कंपनियो ने खरीद रखी है! और हमारी क्रिकेट टीम कप्तान धोनी जब नये-नये आये थे! तब मीडिया मे ऐसे खबरे आती थी ! रोज 2 लीटर दूध पीते हैं धोनी ! ये दूध पीकर धोनी बनने वाला धोनी आज पूरे भारत को पेप्सी का जहर बेच रहा है ! और एक बात ध्यान दे जब भी क्रिकेट मैच की दौरान water break होती है तब इनमे से कोई खिलाड़ी pepsi coke क्यूँ नहीं पीता ? क्यूँ कि ये सब जानते है ये जहर है ! इन्हे बस ये देश वासियो को पिलाना है !
ज्यादातर लोगों से पूछिए कि "आप ये सब क्यों पीते हैं ?" तो कहते हैं कि "ये बहुत अच्छी क्वालिटी का है" | अब पूछिये कि "अच्छी क्वालिटी का क्यों है" तो कहते हैं कि "अमेरिका का है"| और ये उत्तर पढ़े-लिखे लोगों के होते हैं |
जानिए, आप क्या पी रहे हैं!
तो ऐसे लोगों को ये जानकारी दे दूँ कि अमेरिका की एक संस्था है FDA (Food and Drug Administration) और भारत में भी ऐसी ही एक संस्था है, उन दोनों के दस्तावेजों के आधार पर मैं बता रहा हूँ कि, अमेरिका में जो पेप्सी और कोका कोला बिकता है और भारत में जो पेप्सी-कोक बिक रहा है, तो भारत में बिकने वाला पेप्सी-कोक, अमेरिका में बिकने वाले पेप्सी-कोक से 40 गुना ज्यादा जहरीला होता है, सुना आपने ? 40 गुना, मैं प्रतिशत की बात नहीं कर रहा हूँ | और हमारे शरीर की एक क्षमता होती है जहर को बाहर निकालने की, और उस क्षमता से 400 गुना ज्यादा जहरीला है, भारत में बिकने वाला पेप्सी और कोक | तो सोचिए बेचारी आपकी किडनी का क्या हाल होता होगा !जहर को बाहर निकालने के लिए !ये है पेप्सी-कोक की क्वालिटी, और वैज्ञानिकों का कहना है कि जो ये पेप्सी-कोक पिएगा उनको कैंसर, डाईबिटिज, ओस्टियोपोरोसिस, ओस्टोपिनिया, मोटापा, दाँत गलने आदि जैसी 48 बीमारियाँ होगी|
पेप्सी-कोक के बारे में आपको एक और जानकारी देता हूँ - स्वामी रामदेव जी इसे टॉयलेट क्लीनर कहते हैं, आपने सुना होगा (ठंडा मतलब टाइलेट कालीनर ) तो वो कोई इसको मजाक में नहीं कहते या उपहास में नहीं कहते हैं,देश के पढ़े लिखे मूर्ख लोग समझते है कि ये बात किसी ने ऐसे ही बना दी है!
घर-बाहर फ़ल-सब्जियों का ताज़ा रस पीजिए
इसके पीछे तथ्य है, ध्यान से पढ़े! तथ्य ये कि टॉयलेट क्लीनर harpic और पेप्सी-कोक की Ph value एक ही है | मैं आपको सरल भाषा में समझाने का प्रयास करता हूँ | Ph एक इकाई होती है जो acid की मात्रा बताने का काम करती है !और उसे मापने के लिए Ph मीटर होता है | शुद्ध पानी का Ph सामान्यतः 7 होता है ! और (7 Ph) को सारी दुनिया में सामान्य माना जाता है, और जब पानी में आप हाईड्रोक्लोरिक एसिड या सल्फ्यूरिक एसिड या फिर नाइट्रिक एसिड या कोई भी एसिड मिलायेंगे तो Ph का वैल्यू 6 हो जायेगा, और ज्यादा एसिड मिलायेंगे तो ये मात्रा 5 हो जाएगी, और ज्यादा मिलायेंगे तो ये मात्रा 4 हो जाएगी, ऐसे ही करते-करते जितना acid आप मिलाते जाएंगे ये मात्रा कम होती जाती है | जब पेप्सी-कोक के एसिड का जाँच किया गया तो पता चला कि वो 2.4 है और जो टॉयलेट क्लीनर होता है उसका Ph और पेप्सी-कोक का Ph एक ही है, 2.4 का मतलब इतना ख़राब जहर कि आप टॉयलेट में डालेंगे तो ये झकाझक सफ़ेद हो जायेगा | इस्तेमाल कर के देखिएगा।
और हम लोगो का हाल ये है ! घर मे मेहमान के  आते ही ये जहर उसके आगे करते हैं! दोस्तो, हमारी महान भारतीय संस्कृति मे कहा गया है ! अतिथि देवो भव ! मेहमान भगवान का रूप है ! और आप उसे टॉइलेट क्लीनर पिला रहे हैं! 
ताज़ा नींबू-मसाले वाले गन्ने के रस का ज़ादू!
अंत मे राजीव भाई कहते हैं ! कि देश का युवा वर्ग सबसे ज्यादा इस जहर को पीता! और नपुंसकता कि बीमारी सबसे ज्यादा ये जहर पीकर हो रही है ! और कहीं न कहीं मुझे लगता है! ये pepsi coke पूरी देश पूरी जवान पीढ़ी को खत्म कर देगा ! इस लिए हम सबको मिलकर स्कूलों कालेजो मे जा जा कर बच्चो को समझाना चाहिए! आप बस स्कूल कालेजो मे जाते ही उनके सामने इस pepsi coke से वहाँ का टाइलेट साफ कर के दिखा दीजिए! एक मिनट में ही वो मान जाएंगे! और बच्चे अगर मान गये तो उनके घर वाले खुद पर खुद मान जाएंगे! वो एक कहावत हैं न son is a father of father ! बच्चा बाप का बाप होता है ! तो बच्चो को समझाये ! बच्चे ये जहर पीना छोड़ें, बड़े छोड़े और इन दोनों अमेरीकन कंपनियो को अपने देश भगायें !
राजीव भाई कहते हैं 1997 मे जब उन्होने पेप्सी और कोक के खिलाफ अभियान शुरू किया था तो वो अकेले थे लेकिन आज भारत में 70 संस्थाएं हैं जो पेप्सी-कोक के खिलाफ अभियान चला रहीं हैं, हम खुश हैं कि इनके बिक्री में कमी आयी है | और इनकी बिक्री 60% कम हुई ! 1997 मे ये दोनों कंपनिया कुल 700 करोड़ बोतल बेचती थी ! और आज भी बहुत ज्यादा है ! लेकिन अगर हम सब संकल्प ये जहर न खुद पीएंगे न किसी को पिलाएंगे तो ये 50 करोड़ बोतले बिकनी भी बंद हो जायगी!और ये दोनों कंपनिया अपने देश अमेरिका भाग जाएंगी !
यहाँ जरूर जरूर click करे !
http://www.youtube.com/watch?v=XmzcYwFyObc
• खिलाड़ी, फ़िल्मी सितारे और कुछ अन्य मशहूर लोग हमारे आदर्श नहीं हो सकते। ये लोग हमारे मित्र नहीं हैं। इनका काम है अपरोक्ष रूप से हमारा शोषण करने में हमारे स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही अनेक कम्पनियों को सहयोग देना और खुद करोड़ों कमाना। हम कब यह सब समझेंगे। शान या स्टेटस की खातिर ये खतरनाक शीतल पेय पीना बन्द कीजिए, मुफ़्त का माल हो तब भी। दावतों में मेहमानों को ऐसे पेय पिलाकर उनके साथ धोखा आखिर क्यों किया जाता है! तमाम नकली शीतल पेयों को मंगाना, पीना-पिलाना बन्द कीजिए औरों को भी प्रेरित कीजिए!
• इसके अलावा इन कम्पनियों ने पैट बोतलों के रूप में हर गांव-शहर को अपनी चपेट में ले लिया है। जमीन की तहों में पिचकी बोतलें शामिल हो गयी हैं। अक्सर लापरवाही से फ़ैंकी गयी ये बोतलें दुर्घटना का कारण भी बन जाती हैं। 
• सुराही, घड़ा और अन्य बरतनों की जगह ये पैट बोतलें जमकर उपयोग की जा रही हैं। हमारे ये कृत्य निश्चय ही पर्यावरण के विरुद्ध हैं। 
इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.